मालदा हिंसा का मास्टरमाइंड वकील मोफक्करुल इस्लाम गिरफ्तार: एयरपोर्ट से भागने की फिराक में था AIMIM नेता
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पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में भड़की हिंसा और सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। मामले के मुख्य आरोपी और AIMIM नेता मोफक्करुल इस्लाम को सिलीगुड़ी के बागडोगरा एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तारी के समय वह राज्य से बाहर भागने की कोशिश कर रहा था।

कौन है मोफक्करुल इस्लाम? मोफक्करुल इस्लाम पेशे से एक वकील है और कोलकाता हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करता है। वह AIMIM का सक्रिय चेहरा रहा है और 2021 के विधानसभा चुनाव में उत्तर दिनाजपुर की इटाहार सीट से उम्मीदवार भी रह चुका है। स्थानीय राजनीति में अपनी आक्रामक बयानबाजी के लिए पहचाने जाने वाले इस्लाम की सीमावर्ती क्षेत्रों में गहरी पैठ मानी जाती है।

हिंसा का मास्टरमाइंड और भड़काऊ बयान पुलिस जांच में सामने आया है कि इस्लाम ने ही सुजापुर और कालियाचक में हुए विरोध प्रदर्शनों को संगठित किया था। एक वायरल वीडियो में वह प्रशासनिक अधिकारियों को खुलेआम चुनौती देता और उन्हें ललकारता हुआ नजर आ रहा है। पुलिस का मानना है कि उसके इसी उकसावे वाले रुख ने भीड़ को हिंसक बना दिया, जिसके बाद न्यायिक अधिकारियों को 9 घंटे तक बंधक बनाया गया।

क्या है SIR विवाद और हिंसा की जड़? हिंसा की मुख्य वजह वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) है। इस प्रक्रिया में लाखों नाम हटाए जाने और कई नामों को समीक्षा (एडजुडिकेशन) में डाले जाने से स्थानीय लोग नाराज थे। जब न्यायिक अधिकारी कालियाचक के BDO ऑफिस में इस काम के लिए पहुंचे, तो भीड़ ने उन्हें घेर लिया। इस दौरान सरकारी गाड़ियों में तोड़फोड़ और पथराव भी किया गया।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी इस घटना ने देश भर में हड़कंप मचा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इसे क्रिमिनल फेल्योर करार देते हुए राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की है। अदालत ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग को जांच केंद्रीय एजेंसियों (CBI या NIA) से कराने का संकेत दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को 6 अप्रैल को तलब किया है।

आगे क्या? फिलहाल पुलिस मोफक्करुल इस्लाम से कड़ाई से पूछताछ कर रही है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाना महज एक स्थानीय विरोध था या इसके पीछे किसी बड़ी साजिश की पटकथा लिखी गई थी। इस गिरफ्तारी के साथ ही मालदा हिंसा का मामला अब बंगाल की राजनीति के केंद्र में आ गया है, जिसका असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर पड़ना तय है।

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