आंखों की रिपोर्ट नॉर्मल, फिर भी महीनों तक तड़पती रही महिला; डॉक्टर ने ऐसे सुलझाया दर्द का ये रहस्य
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35 साल की अंजलि एक सफल प्रोफेशनल थीं, लेकिन उनकी चमक-दमक भरी जिंदगी के पीछे एक खामोश दुश्मन छिपा था। अंजलि को पिछले छह महीनों से अपनी दाहिनी आंख के पीछे सुई चुभने जैसा गहरा दर्द महसूस हो रहा था। यह दर्द इतना असहनीय था कि उनकी पूरी दिनचर्या बिखर गई थी।

आंखों की हर जांच रही परफेक्ट

अंजलि ने इसे शुरू में स्क्रीन स्ट्रेन समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन दर्द बार-बार लौट रहा था। परेशान होकर उन्होंने दो अलग-अलग नेत्र रोग विशेषज्ञों (Eye Specialists) से सलाह ली। डॉक्टरों ने आंखों की गहराई से जांच की, पुतलियों को फैलाकर देखा और प्रेशर भी चेक किया, लेकिन रिपोर्ट हमेशा नॉर्मल आती रही। अंजलि इस बात से उलझन में थीं कि यदि आंखें ठीक हैं, तो यह दर्द उन्हें अंदर से क्यों तोड़ रहा है?

दर्द के पीछे का छिपा हुआ पैटर्न

दर्द के दौरान अंजलि को यह पैटर्न समझ नहीं आ रहा था कि यह समस्या नींद की कमी, लंच छोड़ने, हाई सॉल्ट फूड खाने या अधिक तनाव के समय बढ़ जाती है। क्योंकि दर्द आंख में हो रहा था, उन्हें कभी नहीं लगा कि इसका संबंध कहीं और हो सकता है। अंततः, एक दोस्त की सलाह पर उन्होंने न्यूरोलॉजिस्ट से मिलने का फैसला किया।

आंखों में नहीं, सॉफ्टवेयर में था बग

अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार ने जब अंजलि की केस हिस्ट्री और लाइफस्टाइल को समझा, तो बीमारी की जड़ साफ हो गई। यह आंखों की समस्या नहीं, बल्कि माइग्रेन का एक प्रकार था।

डॉ. सुधीर के अनुसार, माइग्रेन का मतलब सिर्फ सिरदर्द नहीं होता। यह कई बार अंजलि की तरह आंखों के पीछे दर्द, साइनस के दबाव या गर्दन की जकड़न के रूप में प्रकट होता है। मेडिकल भाषा में कहें तो अंजलि का हार्डवेयर (आंखें) बिल्कुल सही था, लेकिन सॉफ्टवेयर (दिमाग) में गड़बड़ी थी।

सही डायग्नोसिस और बदलाव

बीमारी का नाम मिलते ही इलाज आसान हो गया। डॉ. कुमार ने अंजलि को दवाइयां दीं और लाइफस्टाइल में सुधार करने की सलाह दी। अंजलि ने अपनी नींद, समय पर भोजन और तनाव प्रबंधन को प्राथमिकता दी। धीरे-धीरे वह दर्द गायब हो गया और उनकी कार्यक्षमता फिर से लौट आई।

हम सबके लिए एक बड़ी सीख

यह मामला हमें सिखाता है कि हर बार दर्द का कारण वही अंग नहीं होता जहां हमें पीड़ा महसूस हो रही है। यदि आपके सभी मेडिकल टेस्ट सामान्य आ रहे हैं लेकिन दर्द बना हुआ है, तो केवल लक्षणों का इलाज करने के बजाय किसी विशेषज्ञ की मदद से दर्द की जड़ तक पहुंचना अनिवार्य है। शरीर के संकेतों को समझना ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।

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