गौरव गोगोई की पाकिस्तान यात्रा पर नया खुलासा: रावलपिंडी जाने की बात स्वीकारते ही बढ़ीं मुश्किलें
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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के बीच चल रहा जुबानी जंग अब एक गंभीर कानूनी मोड़ पर आ गया है। मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए पाकिस्तानी कनेक्शन के आरोपों पर अब गौरव गोगोई ने अपनी चुप्पी तोड़ी है।

रावलपिंडी यात्रा पर क्या बोले गोगोई? काफी समय से चल रहे विवादों के बीच, गौरव गोगोई ने स्वीकार किया है कि साल 2013 की अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान वे रावलपिंडी गए थे। हालाँकि, गोगोई ने सफाई देते हुए कहा कि वे वहां केवल अपनी पत्नी के साथ तक्षशिला घूमने गए थे, न कि किसी मिलिट्री हेडक्वार्टर।

वीजा नियमों के उल्लंघन का गंभीर सवाल सीएम हिमंता ने इस स्वीकारोक्ति पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सवाल किया कि यदि गोगोई के पास केवल लाहौर, कराची और इस्लामाबाद का वीजा था, तो वे रावलपिंडी में कैसे पहुंचे?

मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि इजरायल में पासपोर्ट खोने के बाद गोगोई ने सड़क मार्ग से पाकिस्तान में प्रवेश किया था। सरमा ने पूछा है कि भारत-पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों के दौरान उनका सिंगल एंट्री वीजा अचानक मल्टीपल एंट्री में कैसे तब्दील हो गया।

पत्नी एलिजाबेथ और लीड इंडिया का विवाद असम सरकार द्वारा गठित SIT की रिपोर्ट में गौरव गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लीड इंडिया को विदेशों से जो भारी फंड मिला, उसमें से करीब ₹82 लाख सीधे एलिजाबेथ को ट्रांसफर किए गए।

दावा है कि एलिजाबेथ इस्लामाबाद में लीड पाकिस्तान के अधिकारियों के संपर्क में थीं। जांच में यह भी सामने आया है कि उनके पाकिस्तान में बैंक खाते थे, जिसका खुलासा उन्होंने जांच टीम के सामने नहीं किया था।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला? मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का आरोप है कि पाकिस्तान से लौटने के बाद गौरव गोगोई ने संसद में परमाणु प्लांट, रक्षा प्रणाली, सीमा सुरक्षा और यूरेनियम भंडार जैसे अत्यधिक संवेदनशील विषयों पर प्रश्न पूछे थे। सरमा ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए केंद्रीय जांच की मांग की है।

कांग्रेस सांसद का पलटवार इन तमाम आरोपों को गौरव गोगोई ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इसे एक घटिया फिल्म की पटकथा करार दिया है। गोगोई का कहना है कि उन्हें राजनीतिक रूप से बदनाम करने के लिए ये बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं।

इस बीच, असम सरकार ने SIT की रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंप दी है। अब देखना यह होगा कि क्या केंद्र सरकार मामले की गंभीरता को देखते हुए किसी केंद्रीय एजेंसी से इसकी जांच कराती है या नहीं।

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