दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन ने एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में भारत सहित 40 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सुरक्षित रूप से खोलना है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर होर्मुज स्ट्रेट दुनिया भर में होने वाले कुल तेल परिवहन का 20% संभालता है। वर्तमान में जारी जंग के कारण इस रूट से जहाजों का गुजरना मुश्किल हो गया है, जिसके चलते अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में चिंता का माहौल है।
भारत की सक्रिय भूमिका विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की है कि इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश सचिव विक्रम मिसरी कर रहे हैं। भारत ईरान और क्षेत्र के अन्य देशों के साथ निरंतर संपर्क में है ताकि भारतीय जहाजों—जो एलपीजी (LPG) और एलएनजी (LNG) लेकर गुजरते हैं—की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। कूटनीतिक प्रयासों का ही परिणाम है कि बीते दिनों में छह भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से इस मार्ग से निकलने में सफल रहे हैं।
बहरीन प्रस्ताव और भारत का रुख संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विचाराधीन बहरीन प्रस्ताव पर भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप स्वतंत्र और खुले कमर्शियल शिपिंग का समर्थन करता है। भारत लगातार समुद्री सुरक्षा और होर्मुज स्ट्रेट के सुरक्षित संचालन की वकालत कर रहा है।
ईरान बनाम अमेरिका: तनातनी जारी दूसरी ओर, ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट उनके नियंत्रण में है और वे किसी भी बाहरी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जंग में जीत हासिल कर ली है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान को पाषाण काल (Stone Age) में भेजने से पीछे नहीं हटेगा।
अमेरिका की नई नीति: खुद लड़ना सीखें ट्रंप ने हाल ही में अपने सहयोगियों को कड़े शब्दों में संदेश दिया है कि वे अपनी सुरक्षा का इंतजाम खुद करें। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका अब बार-बार मदद के लिए आगे नहीं आएगा। उन्होंने यूके जैसे देशों को सलाह दी है कि वे या तो अमेरिका से तेल खरीदें या खुद नियंत्रण हासिल करने की हिम्मत दिखाएं।
ब्रिटेन का कूटनीतिक प्रयास ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर की अध्यक्षता में हो रही यह बैठक इस नाजुक स्थिति का शांतिपूर्ण समाधान खोजने का एक बड़ा प्रयास है। भारत और अन्य देशों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि यह केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का मामला है जिस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
#WATCH | Delhi: On the Bahrain resolution, MEA spokesperson Randhir Jaiswal says, This particular resolution is under consideration in the UN Security Council... We also know that relevant parties, which means the members of the Security Council, are currently negotiating this… pic.twitter.com/IiTLkNJHgi
— ANI (@ANI) April 2, 2026
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