विदाई में फूट-फूटकर रोया पूरा महकमा: कौन हैं वो जांबाज IPS, जिनके लिए नम हो गईं रामपुर पुलिस की आंखें?
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उत्तर प्रदेश के रामपुर में हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल के बाद एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने सोशल मीडिया पर चर्चा छेड़ दी है। रामपुर के एसपी रहे विद्या सागर मिश्र के विदाई समारोह में वहां मौजूद महिला पुलिसकर्मी और अन्य स्टाफ खुद को रोक नहीं पाए और फूट-फूटकर रोने लगे। एक सख्त पुलिस अधिकारी के प्रति विभाग के लोगों का यह अगाध प्रेम चर्चा का विषय बना हुआ है।

साधारण से असाधारण तक का सफर

बलिया के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले विद्या सागर मिश्र का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उनके पिता कोलकाता पुलिस में कॉन्स्टेबल थे। पिता को वर्दी में देखकर ही विद्या सागर ने बचपन में आईपीएस बनने का सपना पाल लिया था। सरकारी स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कोलकाता यूनिवर्सिटी से बीएससी की और बाद में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई पूरी की।

दो सरकारी नौकरियां ठुकराकर हासिल किया मुकाम

विद्या सागर मिश्र की राह आसान नहीं थी। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में ही दो सरकारी नौकरियां हासिल कर ली थीं, लेकिन उन्होंने उन प्रस्तावों को ठुकरा दिया। उनका लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ आईपीएस बनना था। साल 1993 में उनका चयन पीपीएस (PPS) में हुआ और लंबी सेवा के बाद 2015 में वे आईपीएस अधिकारी बने।

अपराधियों में खौफ, अपनों के लिए मसीहा

आईपीएस विद्या सागर मिश्र को यूपी पुलिस के उन चुनिंदा अधिकारियों में गिना जाता है, जो अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं करते। उनके नाम 45 से अधिक एनकाउंटर दर्ज हैं, जिसके चलते अपराधियों के बीच उनका नाम ही काफी होता है।

लेकिन, वर्दी के इस सख्त अनुशासन के पीछे एक बेहद संवेदनशील इंसान भी है। अपने जूनियर पुलिसकर्मियों के साथ उनका व्यवहार किसी अभिभावक जैसा रहा है। वे अपने स्टाफ को परिवार की तरह मानते थे, यही कारण है कि उनके ट्रांसफर की खबर सुनकर पूरा महकमा भावुक हो गया।

अब सीतापुर में संभालेंगे नई जिम्मेदारी

रामपुर में अपने कार्यकाल के दौरान विद्या सागर मिश्र ने जिस तरह की कार्यशैली अपनाई, उसने पुलिस और जनता के बीच की दूरी को कम किया। अब रामपुर की कमान 2017 बैच के आईपीएस सोमेंद्र मीणा को सौंपी गई है, जबकि विद्या सागर मिश्र को सीतापुर में सेनानायक 11वीं वाहिनी पीएसी के पद पर तैनात किया गया है।

विदाई के दौरान उनका अपने भावुक स्टाफ को सांत्वना देते हुए वीडियो इस बात का प्रमाण है कि एक सच्चा अधिकारी सिर्फ कानून ही नहीं, बल्कि लोगों के दिलों पर भी राज करता है।

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