बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर चल रही सियासी बहस के बीच मशहूर शिक्षक और आम आदमी पार्टी नेता अवध ओझा ने एक नया तर्क पेश किया है। उन्होंने शराबबंदी खत्म करने और राजस्व प्राप्ति के मुद्दे पर सधी हुई प्रतिक्रिया दी है।
शराब से राजस्व जरूरी, पर समाधान क्या? अवध ओझा का मानना है कि राज्य के विकास के लिए राजस्व की आवश्यकता होती है और शराब से मिलने वाला टैक्स इसमें बड़ी भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा, शराब बेचें, राजस्व आता है, यह अच्छी बात है। लेकिन अगर आप शराबबंदी हटाते हैं, तो पहले बिहार में यह अनिवार्य कर दें कि स्कूलों में ध्यान (मेडिटेशन) का अभ्यास कराया जाए।
तनाव और नशे का गहरा नाता उनके अनुसार, लोग तनाव, चिंता और अवसाद के कारण नशे की ओर आकर्षित होते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि बिहार की जनता और बच्चे बचपन से ही ध्यान का अभ्यास करने लगेंगे, तो नशे की लत पर स्वतः ही लगाम लग जाएगी। उनका कहना है कि अगर लोग मानसिक रूप से मजबूत होंगे, तो शराब के खरीदार भी कम हो जाएंगे।
नीतीश कुमार के फैसले की सराहना अवध ओझा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शराबबंदी के फैसले की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि इस कानून से बिहार की महिलाओं को बड़ी राहत मिली है। पहले मजदूर वर्ग अपनी दिनभर की कमाई शाम को शराब में उड़ा देता था, जिससे परिवारों को भारी संकट का सामना करना पड़ता था।
बदलते दौर में क्या है चुनौती? हालांकि, ओझा यह भी मानते हैं कि आने वाले समय में परिस्थितियां बदलेंगी। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में बिहार में मल्टी-नेशनल कंपनियां (MNCs) आती हैं, तो वहां काम करने वाले युवाओं की अपनी जीवनशैली होगी। ऐसे में शराबबंदी का कोई व्यावहारिक विकल्प ढूंढना होगा, ताकि राज्य का विकास भी प्रभावित न हो और माताओं-बहनों की सुरक्षा भी सुनिश्चित रहे।
राज्य में बढ़ती समीक्षा की मांग गौरतलब है कि बिहार में शराबबंदी को लेकर एनडीए गठबंधन के भीतर भी अलग-अलग स्वर उठ रहे हैं। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के नेताओं ने भी समय-समय पर शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग उठाई है। अवध ओझा का यह बयान अब इस बहस में एक नया वैचारिक आयाम जोड़ रहा है।
Delhi: When asked about the end of the liquor ban in Bihar, AAP leader and Educator Avadh Ojha says, Liquor sale will end and sale of liquor will start. No problem, if you sell liquor and you get revenue from liquor, it is a good thing, high revenue. But do meditation in Bihar… pic.twitter.com/oyj2stO7mW
— IANS (@ians_india) April 2, 2026
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