ईरान की सड़कों पर राष्ट्रपति की सेल्फी: क्या ट्रंप ने मान ली अपनी हार?
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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान से आई तस्वीरें दुनिया को चौंका रही हैं। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची को सड़कों पर आम लोगों के बीच सेल्फी लेते और विरोध प्रदर्शन में शामिल होते देखा गया। यह नजारा तब है जब इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने बाइबिल के 10 प्लेग्स (10 महामारियों) का हवाला देते हुए ईरान को पूरी तरह मिटा देने की धमकी दे रखी है।

ट्रंप का बदला रुख: 32 दिन बाद बदला सुर फरवरी के अंत में जब डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन एपिक फ्युरी शुरू किया था, तब उन्होंने महज एक घंटे में जीत का दावा किया था। उनका मानना था कि ईरान की सैन्य शक्ति 100% नष्ट हो चुकी है। लेकिन युद्ध के 32 दिन बाद ट्रंप का रुख पूरी तरह बदल गया है। उन्होंने घोषणा की है कि किसी भी समझौते के बिना, अमेरिकी सेना अगले दो-तीन हफ्तों के भीतर मिडिल ईस्ट से बाहर निकल जाएगी।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना अमेरिका की मजबूरी ट्रंप ने पहले दावा किया था कि ईरान की सैन्य क्षमता खत्म हो चुकी है और अन्य देशों को हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा संभालनी चाहिए। हकीकत यह है कि इसी रास्ते से होने वाली तेल सप्लाई ने अमेरिका को बैकफुट पर धकेल दिया है। ट्रंप जिसे भिखारी बता रहे थे, उसी ईरान ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर सीजफायर स्वीकार नहीं करेंगे और अपनी शर्तों पर अडिग रहेंगे।

हिट लिस्ट से नाम हटे, तनाव जारी ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत का रास्ता खुला रखने के लिए अमेरिका और इजरायल ने अपनी हिट लिस्ट से अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ के नाम हटा दिए हैं। अराघची ने पुष्टि की है कि अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के साथ संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक बातचीत नहीं हुई है।

ईरान का रुख: न समझौता, न झुकना ईरान ने अमेरिका के 15-पॉइंट वाले प्रस्ताव पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। सड़कों पर उतरकर राष्ट्रपति का यह शक्ति प्रदर्शन यह संदेश देता है कि ईरान किसी भी भारी हमले या धमकियों के दबाव में नहीं है। क्या ट्रंप की जल्दबाजी में वापसी वास्तव में एक रणनीतिक हार है? फिलहाल, मिडिल ईस्ट का भविष्य इस अनिश्चितता के बीच झूल रहा है।

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