क्या आंसुओं का द्वार बंद होने की कगार पर है? वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया बड़ा संकट
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मध्य पूर्व में जारी तनाव अब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों के लिए खतरा बन गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद अब बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Bab el-Mandeb Strait) पर गहरा संकट मंडरा रहा है। इस रास्ते को अक्सर गेट ऑफ टियर्स या आंसुओं का द्वार कहा जाता है।

क्या है आंसुओं का द्वार का रणनीतिक महत्व? लाल सागर के मुहाने पर स्थित यह रास्ता यमन और अफ्रीकी देशों (इरिट्रिया और जिबूती) के बीच सिर्फ 30 किलोमीटर चौड़ी एक समुद्री पट्टी है। यह स्वेज नहर के जरिए भूमध्य सागर और हिंद महासागर को जोड़ने वाला सबसे छोटा मार्ग है। दुनिया के कुल व्यापार का लगभग 12% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

हुती विद्रोहियों और ईरान की भूमिका ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों ने इस क्षेत्र में अपने हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने हुतियों को समुद्री जहाजों को निशाना बनाने का निर्देश दिया है। हुती, ईरान के एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस (हमास, हिजबुल्लाह और इराक के लड़ाके) का हिस्सा हैं। ईरान खुद होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अपनी मजबूत स्थिति का फायदा उठाकर जहाजों पर नजर रखने और मिसाइल हमले करने में सक्षम है।

रास्ता बंद हुआ तो क्या होगा? अगर यह समुद्री मार्ग बंद होता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन ठप हो सकती है। वर्तमान में, सऊदी अरब से नीदरलैंड जाने वाले तेल टैंकर को इस रास्ते से 12,000 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। रास्ता बंद होने पर जहाजों को अफ्रीका के नीचे से घूमकर जाना होगा, जिससे दूरी बढ़कर 20,000 किलोमीटर हो जाएगी। यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, इससे यात्रा का समय 19 दिन से बढ़कर 34 दिन हो जाएगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के आंकड़ों के मुताबिक, इस रास्ते से रोजाना लगभग 42 लाख बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते हैं। यह पूरी दुनिया की मांग का 5% है। तेल और गैस के अलावा, अनाज, कोयला और लोहे जैसे आवश्यक सामानों की ढुलाई भी इसी मार्ग पर निर्भर है। हमलों के डर से शिपिंग कंपनियों का बीमा खर्च (Insurance cost) 0.6% से बढ़कर 2% तक पहुंच गया है।

क्या स्थायी समाधान है? एक्सपर्ट्स का मानना है कि होर्मुज की तरह बाब-अल-मंदेब को पूरी तरह बंद करना कठिन है, लेकिन हुती हमलों का डर ही ग्लोबल ट्रेड के लिए सबसे बड़ा खतरा है। भले ही पूर्ण नाकेबंदी न हो, लेकिन बीमा लागत और जहाजों का लंबा रूट लेना दुनियाभर में मंहगाई को बेतहाशा बढ़ा सकता है। यदि होर्मुज और बाब-अल-मंदेब दोनों रास्ते एक साथ प्रभावित होते हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बड़े संकट की चपेट में आ सकती है।

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