भारतीय सेना को शराबी-बलात्कारी बताकर विदेशी आकाओं के गुणगान में जुटे कट्टरपंथी: आखिर ये कौन लोग हैं?
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देश की रक्षा के लिए अपनी जान दांव पर लगाने वाली भारतीय सेना के खिलाफ जहर उगलना कट्टरपंथी जमात के लिए एक नया ट्रेंड बन गया है। हाल ही में सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल हुए हैं जिनमें बुर्काधारी महिलाएं और कट्टरपंथी विचारधारा के लोग भारतीय सेना को अपमानजनक शब्दों से संबोधित करते हुए नजर आ रहे हैं। ये लोग न केवल सेना का अनादर कर रहे हैं, बल्कि खुलेआम विदेशी मुल्कों और उनके आकाओं के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर कर रहे हैं।

ईरान के प्रति वफादारी, भारत की सेना का अपमान हालिया वायरल वीडियो में एक बुर्काधारी महिला को यह कहते सुना गया कि वह भारतीय सेना को दान नहीं देगी क्योंकि वे शराबी और कबाबी हैं। उसका दावा है कि उसकी निष्ठा केवल ईरान के प्रति है और वह अपना दान केवल अपने रहबर ईरान को ही देगी। यह पहली बार नहीं है जब देश विरोधी सुर सुनाई दिए हैं। इससे पहले भी लखनऊ, दिल्ली और कश्मीर से ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें प्रदर्शनकारियों ने खुलेआम विदेशी नेताओं के लिए जान देने की बातें कही हैं।

देश से पहले मजहब की कड़वी सच्चाई मौलाना साजिद राशीदी जैसे लोगों के बयान इस कट्टरपंथ की जड़ को उजागर करते हैं। राशीदी ने सरेआम कहा था कि यदि कभी भारत और ईरान के बीच युद्ध हुआ, तो भारतीय मुसलमान ईरान का साथ देंगे। यह बयान इस बात का प्रमाण है कि एक विशेष कट्टरपंथी वर्ग के लिए राष्ट्रीयता से ऊपर उनका मजहबी एजेंडा है। यह वही जमात है जो गाजा, फिलीस्तीन या ईरान पर संकट आने पर तो सड़कों पर उतर आती है, लेकिन भारत की किसी आपदा या त्रासदी में उनकी मानवता कहीं नजर नहीं आती।

सेक्युलरिज्म के नाम पर देश की सुरक्षा से खिलवाड़ लोकतांत्रिक भारत में अभिव्यक्ति की आजादी का गलत फायदा उठाते हुए ये कट्टरपंथी तत्व अक्सर देश की संप्रभुता को चुनौती देते हैं। विडंबना यह है कि सेक्युलरिज्म के नाम पर एक बड़ा वर्ग या तो इन पर मौन रहता है या इनका बचाव करता है। यह कथित सहजता देश के लिए घातक साबित हो रही है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर सेना को गाली देना और विदेशी ताकतों के लिए फंड जुटाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि उन सैनिकों का भी अपमान है जो सीमा पर खड़े होकर इन लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

सेना की सेवा बनाम कट्टरपंथ की संकीर्णता यह कड़वा सच है कि जिस भारतीय सेना को ये लोग शराबी-बलात्कारी कहते हैं, वही सेना देश में आने वाली हर प्राकृतिक आपदा, भूकंप या युद्ध के समय सबसे पहले मदद के लिए पहुंचती है। चाहे कश्मीर हो या देश का कोई भी कोना, भारतीय सेना बिना किसी भेदभाव के सेवा करती है। दूसरी ओर, यह कट्टरपंथी जमात केवल उसी को मदद करती है जो उनके मजहबी दायरे में आता है। मजहब देखकर मानवता दिखाने वाले ये लोग भूल जाते हैं कि उनकी यह आजादी केवल उसी सेना की वजह से सुरक्षित है जिसे वे निशाना बना रहे हैं।

समय आ गया है कि देश में बढ़ रहे इस कट्टरपंथ पर सख्ती से विचार किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग देश के खिलाफ जहर उगलने के लिए न हो।

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