असम की गोल्डन लीफ : चीन से जर्मनी तक क्यों दुनिया है इस चाय की दीवानी?
News Image

पीएम मोदी का दौरा और चाय का महत्व असम में चुनावी सरगर्मियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिब्रूगढ़ के चाय बागानों का दौरा किया। वहां उन्होंने न केवल महिला श्रमिकों से मुलाकात की, बल्कि सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए असम की चाय को राज्य की आत्मा बताया। यह दौरा असम की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले चाय उद्योग के वैश्विक प्रभाव को फिर से चर्चा में ले आया है।

असम: दुनिया की टी कैपिटल असम को विश्व की टी कैपिटल कहा जाता है। भारत के कुल चाय उत्पादन में असम अकेले 50 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है। राज्य में करीब 800 चाय बागान हैं, जिनमें बिस्वनाथ जिले का मोनाबारी बागान दुनिया का सबसे बड़ा बागान माना जाता है, जो 1,373 हेक्टेयर में फैला है।

आंकड़ों में कारोबार का विशाल स्वरूप असम का चाय उद्योग न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह लाखों लोगों की जीविका का आधार भी है। यहाँ सालाना 650 से 700 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन होता है। इस पूरे सेक्टर में लगभग 10 लाख लोग कार्यरत हैं, जिनमें से 7 लाख अकेले चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिक हैं।

वैश्विक स्तर पर फैली है मांग असम की चाय की खुशबू और कड़क स्वाद का डंका पूरी दुनिया में बजता है। यह चाय ईरान, रूस, यूएई, ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, कनाडा, चीन, जर्मनी और कजाकिस्तान समेत 20 से अधिक देशों में निर्यात की जाती है। दुबई इस चाय के लिए एक प्रमुख री-एक्सपोर्ट हब के तौर पर काम करता है, जहाँ से इसे अन्य देशों में भेजा जाता है।

यूरोपीय बाजारों में भी धाक हाल के व्यापार समझौतों ने असम की चाय के लिए नए द्वार खोले हैं। अब यह चाय बिना किसी बाधा के यूरोपीय संघ (EU) के 27 देशों तक आसानी से पहुँच रही है। अंतरराष्ट्रीय निर्यात के अलावा, भारत के घरेलू बाजार में भी इसकी भारी मांग है; उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र असम की चाय के सबसे बड़े उपभोक्ता राज्य हैं।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

क्या आंसुओं का द्वार बंद होने की कगार पर है? वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया बड़ा संकट

Story 1

वंदे भारत के ड्राइवर के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाई महिला, फिर जो हुआ वह किसी चमत्कार से कम नहीं!

Story 1

जनगणना 2027: डिजिटल युग में कदम, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने घर बैठे भरा फॉर्म

Story 1

अब एयरपोर्ट पर भी रॉकेट जैसी डिलीवरी: ब्लिंकिट अब अदाणी के साथ मिलकर पहुंचाएगा सामान

Story 1

मिडिल ईस्ट में महायुद्ध का काउंटडाउन: क्या 18 अप्रैल तक थम जाएगा ईरान-इजरायल संघर्ष?

Story 1

क्या थाला की होगी वापसी? RCB के खिलाफ महामुकाबले से पहले धोनी के वीडियो ने बढ़ाई फैंस की धड़कनें

Story 1

ईरान की सड़कों पर राष्ट्रपति की सेल्फी: क्या ट्रंप ने मान ली अपनी हार?

Story 1

1948 की अधूरी लड़ाई का 2026 में अंत: अमित शाह ने पूरा किया सरदार पटेल का अखंड भारत मिशन

Story 1

इसे ही कहते हैं जिम्मेदारी का बोझ, वायरल हो रही एक मजदूर की मार्मिक तस्वीर

Story 1

क्या इजरायल को निशाना बनाने से डरता है पाकिस्तान? हामिद मीर के खुलासे ने मचाई खलबली