1948 की अधूरी लड़ाई का 2026 में अंत: अमित शाह ने पूरा किया सरदार पटेल का अखंड भारत मिशन
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नेशनल डेस्क: भारत के आंतरिक सुरक्षा इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने एक महत्वपूर्ण पोस्ट के जरिए दावा किया है कि जिस नक्सलवाद के खिलाफ सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1948 में मोर्चा खोला था, उसे 2026 में अमित शाह के नेतृत्व में पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। यह उपलब्धि लौह पुरुष के अखंड और सुरक्षित भारत के सपने को आधुनिक पूर्णता देने के समान है।

ऐतिहासिक विश्वासघात: जब कम्युनिस्टों ने उठाए हथियार 1948 में, जब देश आजादी का जश्न मना रहा था, तब कलकत्ता थीसिस के तहत कम्युनिस्ट नेताओं ने भारत की स्वतंत्रता को झूठा करार दिया था। उन्होंने तेलंगाना में सशस्त्र विद्रोह छेड़ दिया और आश्चर्यजनक रूप से हैदराबाद के निजाम और क्रूर रजाकार मिलिशिया के साथ हाथ मिलाकर भारतीय सेना के खिलाफ जंग छेड़ दी। उस समय सरदार पटेल ने कड़ा रुख अपनाते हुए कम्युनिस्ट पार्टी पर प्रतिबंध लगाया और उग्रवाद को कुचलकर चरमपंथियों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने पर मजबूर किया।

2026: जीरो टॉलरेंस से नक्सलवाद का खात्मा सरदार पटेल की उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए, गृह मंत्री अमित शाह ने 2026 में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक प्रहार किया। सरकार ने विकास और सुरक्षा के ब्लूप्रिंट पर चलते हुए नक्सली फंडिंग और रसद की कमर तोड़ दी। आज, भारत के रेड कॉरिडोर का नामोनिशान मिट चुका है। जो इलाके कभी हिंसा का केंद्र थे, वहां अब स्कूल, सड़कें और अस्पताल बन रहे हैं।

नैरेटिव का विरोधाभास: संविधान के नाम पर छलावा आरपी सिंह ने अपने संदेश में उन तत्वों पर भी निशाना साधा जो आज संविधान की आड़ में राजनीति करते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि इतिहास में ये वही विचारधाराएं थीं जिन्होंने सबसे पहले भारत के संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ हथियार उठाए थे। जबकि राष्ट्रवादी संगठन देश के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने में लगे थे, ये अराजक तत्व देश को अस्थिर करने की साजिशों में जुटे थे।

निष्कर्ष: एक सुरक्षित राष्ट्र का उदय 2026 तक नक्सलवाद के कलंक का पूरी तरह मिटना, सरदार पटेल द्वारा शुरू किए गए पुलिस एक्शन की याद दिलाता है। यह न केवल सुरक्षा बलों की रणनीतिक सटीकता की जीत है, बल्कि उस संकल्प की सफलता है जिसने यह सुनिश्चित किया कि भारत की प्रगति के मार्ग में अब कोई हिंसक रोड़ा नहीं रहेगा।

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