हॉर्मुज संकट और भारत की ऊर्जा सुरक्षा: LPG और LNG पर क्या है असर?
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मध्य-पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, हॉर्मुज स्ट्रेट को संकट में डाल दिया है। दुनिया का 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस रूट पर भारी निर्भर है। इस संकट के बीच सवाल यह है कि भारत पर इसका कितना गहरा असर पड़ सकता है?

हॉर्मुज का संकट और भारत पर दबाव

हॉर्मुज स्ट्रेट के आंशिक रूप से बंद होने से भारत के ऊर्जा आयात पर सीधा असर पड़ा है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि रणनीतिक तेल भंडार और पर्याप्त स्टॉक के कारण हालात नियंत्रण में हैं। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को थामने के लिए सरकार ने उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है, ताकि आम आदमी पर बोझ न पड़े। लेकिन अब नजरें LPG और LNG की कीमतों और आपूर्ति पर टिकी हैं।

क्या है LNG और RLNG?

LNG (लिक्विफाइड नैचुरल गैस) वह प्राकृतिक गैस है जिसे -162°C पर ठंडा कर तरल बनाया जाता है, जिससे इसका वॉल्यूम 600 गुना कम हो जाता है। यह लंबी दूरी के परिवहन के लिए आसान है, लेकिन इसके लिए बेहद जटिल और महंगे इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है। जब यह गैस अपने गंतव्य पर पहुँचती है, तो इसे फिर से गैस में बदलने की प्रक्रिया को रीगैसिफिकेशन कहा जाता है, जिसके बाद इसे RLNG के नाम से जाना जाता है।

LPG: घर-घर की जरूरत और नया संकट

LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण है। इसे सामान्य तापमान पर थोड़े दबाव में सिलेंडरों में रखा जा सकता है, इसलिए यह घरों में खाना पकाने के लिए सबसे सुरक्षित और सुलभ है। भारत अपनी 60% LPG जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है और इसका 90% हिस्सा हॉर्मुज रूट से आता है। यही कारण है कि हॉर्मुज संकट का सबसे सीधा असर घर के चूल्हे तक पहुँचने वाली गैस पर पड़ने की आशंका है।

LNG बनाम LPG: कौन ज्यादा प्रभावित?

सरकार का क्या है रुख?

पेट्रोलियम मंत्रालय ने लोगों को आश्वस्त किया है कि आपूर्ति निर्बाध बनी रहेगी। घरेलू रिफाइनरियों ने अपना उत्पादन बढ़ाकर 50,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन तक पहुंचा दिया है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई है। इसके अलावा, सरकार खाड़ी देशों के अलावा अमेरिका, रूस और नॉर्वे जैसे देशों से भी आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है। हॉर्मुज रूट से होकर 94,000 मीट्रिक टन LPG लेकर दो जहाज भारतीय तटों की ओर बढ़ रहे हैं।

निष्कर्ष

फिलहाल, सरकार का दावा है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। हालांकि, हॉर्मुज संकट अगर लंबा खिंचता है, तो LPG सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोत्तरी और LNG के माध्यम से औद्योगिक लागत में वृद्धि होना तय है। सरकार का मुख्य जोर अब घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात के स्रोतों को विविध (diversify) करने पर है।

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