इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के बीच एक बार फिर प्रेस की आजादी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वेस्ट बैंक में कवरेज के दौरान इजरायली सैनिकों द्वारा CNN की पत्रकार टीम के साथ की गई हिंसा के बाद IDF (इजरायल डिफेंस फोर्सेज) को बैकफुट पर आना पड़ा है। शर्मिंदगी से बचने के लिए सेना ने अपनी उस पूरी बटालियन को ही वापस बुला लिया है, जो इस घटना में शामिल थी।
फॉरेन प्रेस एसोसिएशन (FPA) के अनुसार, घटना पिछले गुरुवार की है। CNN की टीम तयासिर गांव के पास इजरायली बसने वालों द्वारा किए जा रहे हमलों और अवैध चौकी निर्माण की रिपोर्टिंग कर रही थी। तभी इजरायली सैनिकों ने उन्हें घेर लिया। सैनिकों ने न केवल पत्रकारों पर बंदूकें तानीं, बल्कि एक फोटो जर्नलिस्ट को पीछे से गर्दन से पकड़कर जमीन पर गिरा दिया और उनका कैमरा भी तोड़ दिया।
पत्रकारों के साथ हुई इस बदसलूकी को FPA ने प्रेस की आजादी पर एक सीधा और हिंसक हमला करार दिया है। इस घटना में फ्रांसीसी नागरिक और फोटो जर्नलिस्ट सिरिल थियोफाइल के अलावा अन्य पत्रकार भी शिकार हुए। CNN ने भी औपचारिक रूप से इस घटना की पुष्टि करते हुए इसे स्वीकार्य नहीं बताया है।
घटना के बाद उपजे विवाद और अंतरराष्ट्रीय आलोचना के दबाव में IDF को कार्रवाई करनी पड़ी। सेना ने बयान जारी कर कहा कि शामिल बटालियन को तत्काल प्रभाव से वापस बुला लिया गया है। इन सैनिकों को अब दोबारा फील्ड में भेजने से पहले प्रोफेशनल और मोरल ट्रेनिंग (नैतिक प्रशिक्षण) से गुजरना होगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ही भविष्य में उन्हें किसी ऑपरेशन का हिस्सा बनाया जाएगा।
यह इस महीने CNN के साथ हुई दूसरी घटना है। मार्च में ही यरुशलम में इजरायली पुलिस द्वारा बिना किसी उकसावे के किए गए हमले में CNN के एक प्रोड्यूसर की कलाई टूट गई थी। कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2023 से शुरू हुए गाजा युद्ध के बाद इजरायल पत्रकारों को कैद करने वाले दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल हो गया है। अब तक 60 से अधिक फिलिस्तीनी पत्रकारों को हिरासत में लिया जा चुका है।
हालांकि विदेशी पत्रकारों को फिलिस्तीनी पत्रकारों की तुलना में कम खतरा माना जाता था, लेकिन मौजूदा हालात यह बताते हैं कि ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान अब वे भी इजरायली सैनिकों के निशाने पर हैं। आए दिन पत्रकारों पर हथियार तानने और उन्हें हिरासत में लेने की खबरें प्रेस की स्वतंत्रता के लिए एक बड़ा खतरा बनकर उभर रही हैं।
इजरायली सेना की यह कार्रवाई महज एक औपचारिक खानापूर्ति है या फिर पत्रकारों के प्रति उनके रवैये में कोई बड़ा बदलाव आएगा, यह आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, इस घटना ने एक बार फिर युद्ध के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय बहस तेज कर दी है।
🔴✅🇵🇸🇮🇱 FLASH
— BREF_INFOS (@BREF_ACTUALITES) March 28, 2026
L armée israélienne a agressé un photographe et retenu pendant deux heures une équipe de CNN qui couvrait des violences de colons dans le village de Tayasir, en Cisjordanie occupée .
L équipe de CNN, conduite par le correspondant à Jérusalem Jeremy Diamond, est… pic.twitter.com/msa7rrAgjA
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