पेरिस में गूंजी भारत-फ्रांस की दोस्ती: पीएम मोदी का संदेश लेकर राष्ट्रपति मैक्रों से मिले जयशंकर
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से राष्ट्रपति मैक्रों को हार्दिक शुभकामनाएं और अभिवादन प्रेषित किया।

जयशंकर ने इस बैठक को अपने लिए सम्मान बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा कि वे राष्ट्रपति मैक्रों के साथ हुई चर्चाओं और उनके दृष्टिकोण को अत्यधिक महत्व देते हैं। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते रक्षा और रणनीतिक संबंधों की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

रणनीतिक साझेदारी को मिली नई रफ्तार यह बैठक राष्ट्रपति मैक्रों की फरवरी में हुई भारत यात्रा के महज एक महीने बाद हुई है। मैक्रों की उस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को अगले स्तर पर ले जाना था।

भारत और फ्रांस ने तकनीकी सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भारत-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026 की घोषणा की है। भविष्य की तकनीक और एआई (AI) क्षेत्र में दोनों देशों की साझा रुचि यह दर्शाती है कि भविष्य में भारत और फ्रांस एक-दूसरे के सबसे अहम तकनीकी भागीदार बनने की ओर अग्रसर हैं।

सांस्कृतिक कूटनीति का नया केंद्र पेरिस यात्रा के दौरान डॉ. जयशंकर ने नवनिर्मित स्वामी विवेकानंद कल्चरल सेंटर का भी दौरा किया। यह केंद्र पेरिस में भारतीय कला और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए एक प्रमुख धुरी के रूप में कार्य करेगा।

भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) द्वारा संचालित इस केंद्र में भारतीय आध्यात्मिक विरासत के शानदार नमूनों को प्रदर्शित किया गया है। इसमें ट्री-ऑफ-लाइफ म्यूरल और बारीक मिनिएचर पेंटिंग्स प्रमुख हैं। यह केंद्र पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाने के संकल्प का परिणाम है।

भू-राजनीतिक चुनौतियों पर भारत की नजर विदेश मंत्री 27 मार्च को फ्रांस में आयोजित जी-7 (G7) विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे थे। इस वैश्विक मंच पर उन्होंने वर्तमान भू-राजनीतिक अस्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों पर चिंता जताई।

जयशंकर ने इस दौरान इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक व्यापार और सुरक्षित सप्लाई चेन को बनाए रखने के लिए आईएमईसी आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उनके अनुसार, पश्चिम एशिया का संघर्ष यह साबित करता है कि दुनिया को सुरक्षित और मजबूत व्यापारिक रास्तों की सख्त आवश्यकता है, जिसमें भारत और फ्रांस की साझेदारी निर्णायक भूमिका निभाएगी।

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