# ईरान का वो मास्टरप्लान, जिसके आगे बेबस हुए ट्रंप; जंग में क्या अमेरिका की हो रही है हार?
News Image

DNA एनालिसिस: जिस ईरान को अमेरिका सैन्य ताकत के दम पर कुचलना चाहता था, आज उसी ईरान के बिछाए जाल में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप फंसते नजर आ रहे हैं। ईरान की रणनीति मिसाइलों से कहीं ज्यादा घातक आर्थिक युद्ध साबित हो रही है।

ट्रंप की बढ़ती बेचैनी और डेडलाइन का खेल

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप बार-बार ईरान के ऊर्जा संयंत्रों (Power Plants) पर हमले की डेडलाइन बढ़ा रहे हैं और वार्ता का दावा कर रहे हैं। हालांकि, ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान ने साफ किया है कि कोई बातचीत नहीं हो रही है। इस बीच, ईरान समर्थक गुटों ने इजरायल, सऊदी अरब और यूएई में अमेरिकी ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। ईरान आक्रामक है और अमेरिका बचाव की मुद्रा में दिखाई दे रहा है।

20 वर्षों का साइलेंट वॉर प्लान

ईरान भली-भांति जानता है कि सैन्य ताकत में वह अमेरिका का मुकाबला नहीं कर सकता। इसीलिए, बीते 20 सालों में उसने सीधी जंग के बजाय असिमेट्रिक वॉरफेयर (Asymmetric Warfare) की रणनीति तैयार की है। अमेरिका जहां ईरानी नेताओं को मारने और सैन्य ठिकाने तबाह करने पर केंद्रित है, वहीं ईरान का पूरा जोर वैश्विक महंगाई और तेल संकट पैदा करने पर है। ईरान देख रहा है कि युद्ध से अमेरिका के विदेशी मुद्रा भंडार और कर्ज पर कितना गहरा असर पड़ेगा।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर ईरान की मार

ईरान की रणनीति के तीन मुख्य स्तंभ हैं:

  1. अमेरिकी कर्ज का बोझ: युद्ध के कारण अमेरिकी कर्ज पर ब्याज दरें 40 बेसिस प्वाइंट बढ़ गई हैं। 39 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज पर अमेरिका को अब सालाना 195 बिलियन डॉलर (लगभग 18 लाख करोड़ रुपये) अतिरिक्त ब्याज देना होगा।
  2. येन और डॉलर का संकट: जापान जैसे बड़े कर्जदाता देशों की मुद्रा कमजोर होने से वैश्विक बाजार में अमेरिकी बॉन्ड की कीमतें गिर रही हैं, जिससे अमेरिका पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
  3. महंगाई का चक्र: कच्चा तेल 40% तक महंगा हो चुका है। इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बिगड़ रही है, जिसका सीधा असर अमेरिकी नागरिकों की जेब पर पड़ रहा है।

क्या ट्रंप का दांव उल्टा पड़ गया?

अमेरिका को उम्मीद थी कि हमले के बाद ईरान में आंतरिक विद्रोह होगा और सत्ता परिवर्तन हो जाएगा। लेकिन हुआ इसका उलट। अमेरिका में अब ट्रंप के खिलाफ No Kings Protest जैसे बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं। महंगाई, ईंधन की कीमतों और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 47% से घटकर 36% पर आ गई है।

हथियारों का भंडार और चीन का फैक्टर

युद्ध के शुरुआती 16 दिनों में ही अमेरिका और इजरायल ने 11 हजार से ज्यादा मिसाइलें खर्च कर दी हैं। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अमेरिका के पास सीमित हथियार भंडार है, जबकि रूस और चीन ईरान को लगातार बैकअप दे रहे हैं। रणनीतिकारों का मानना है कि अमेरिका ने ईरान की ताकत का गलत आकलन किया।

MI6 के पूर्व प्रमुख सर एलेक्स यंगर के मुताबिक, अब युद्ध की कमान ईरान के हाथ में है। तेहरान के लिए यह युद्ध केवल सैन्य नहीं, बल्कि अस्तित्व और सम्मान की लड़ाई है, जिसमें पीछे हटने का विकल्प उनके पास नहीं है। ट्रंप की बेचैनी बताती है कि ईरान का मास्टरप्लान फिलहाल काम कर रहा है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

रामनवमी पर अयोध्या में अद्भुत चमत्कार: रामलला का हुआ दिव्य सूर्य तिलक

Story 1

रोहित शर्मा को देख हैरान हुईं नीता अंबानी, फिटनेस देख कहा- तुम्हें पहचान ही नहीं पाई!

Story 1

ईरान के लिए कश्मीरी दूल्हे ने कुरबान कर दी शादी की नोटों की माला , जज्बे को सलाम

Story 1

PSL 11: क्रिकेट के मैदान पर चमत्कार या ग्लिच? खेल के बीच अचानक पिंक हो गई सफेद गेंद!

Story 1

सम्राट अशोक की जयंती पर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी से हुई ऐतिहासिक चूक , वीडियो हुआ वायरल

Story 1

ईरान की मिसाइलों पर Thank You India : आखिर तेहरान ने क्यों दुनिया के सामने जताया भारत का आभार?

Story 1

PSL 2026: रंग बदलने वाली गेंद से हंसी का पात्र बनी लीग, जर्सी की घटिया क्वालिटी पर मचा बवाल

Story 1

गढ़वा में रामनवमी जुलूस पर पथराव: आंसू गैस और लाठीचार्ज से गूंजा इलाका, पुलिस ने संभाला मोर्चा

Story 1

सीएम योगी को नन्ही बच्ची ने भेंट किया बुलडोजर , फिर हुआ यह प्यारा वाकिया

Story 1

होर्मुज में बवाल के बीच जयशंकर ने फेंका ऐसा पासा , दुनिया के पावरफुल देशों के माथे पर आया पसीना, चीन बना बड़ा विलेन