विधायक या मिशनरियों के एजेंट? BJP MLA मोहन कोंकणी पर धर्मांतरण के गंभीर आरोप
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दक्षिण गुजरात के आदिवासी अंचल में इस समय धर्म और संस्कृति को लेकर बड़ा संग्राम छिड़ा हुआ है। तापी जिले से बीजेपी विधायक मोहन कोंकणी पर अपने ही समाज के साथ विश्वासघात करने और गुप्त रूप से धर्मांतरण को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लगे हैं। यह मामला तब गरमाया, जब विधायक के बेटे के गृह प्रवेश कार्यक्रम में पारंपरिक ब्राह्मणों के बजाय ईसाई पादरियों ने अनुष्ठान किए।

निजी कार्यक्रम या सांस्कृतिक अतिक्रमण? विधायक के घर पर हुए इस कार्यक्रम ने स्थानीय जनजातीय समाज को झकझोर कर रख दिया है। आलोचनाओं का जवाब देते हुए मोहन कोंकणी ने इसे अपनी निजी आस्था बताया है। हालांकि, सामाजिक कार्यकर्ताओं और देव बिरसा सेना का कहना है कि एक जनप्रतिनिधि का व्यवहार समाज के लिए संदेश होता है। आलोचकों का तर्क है कि पादरियों के माध्यम से गृह प्रवेश करवाकर विधायक ने अप्रत्यक्ष रूप से अपने समाज को धर्मांतरण का संदेश दिया है।

वायरल वीडियो से खुले राज सोशल मीडिया पर विधायक का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे किसी ईसाई सभा को संबोधित करते दिख रहे हैं। वीडियो में विधायक एक पेशेवर पादरी की तरह ईसा मसीह और माता मरियम का गुणगान करते और लोगों को अपने साथ और अधिक लोगों को लाने के लिए प्रेरित करते सुनाई दे रहे हैं। इसे लेकर देव बिरसा सेना ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विधायक सिर्फ कागजों पर आदिवासी हैं, जबकि उनके कार्य पूरी तरह से मिशनरी एजेंडे को आगे बढ़ाने वाले हैं।

धर्मांतरण का जाल और डबल गेम स्थानीय स्तर पर आरोप है कि तापी और डांग जिलों में पिछले कुछ वर्षों में 1500 से अधिक अवैध चर्च खड़े कर दिए गए हैं। डबल गेम का खेल यह है कि आदिवासी समुदाय सरकारी कागजों में अपनी जनजाति का दर्जा और आरक्षण पाने के लिए खुद को हिंदू बनाए रखते हैं, लेकिन अंदरूनी तौर पर ईसाई रीति-रिवाजों को अपना रहे हैं। हिंदूवादी संगठनों की मांग है कि ऐसे लोगों को तत्काल जनजातीय सूची से बाहर (डिलिस्ट) किया जाए।

पवित्र स्थलों पर कब्जे का आरोप आरोप है कि जनजातीय समाज की कुलदेवी के पवित्र स्थल (जैसे सोनगढ़ का गीधमाड़ी आया पहाड़) अब ईसाई मिशनरियों के कब्जे में हैं। हिंदू प्रतीकों को हटाकर वहां मरियम माता के स्थान बनाए गए हैं, जहां अब असली वनवासियों को ही प्रवेश करने से रोका जा रहा है। विधायक ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सबूत मांगे हैं, लेकिन स्थानीय जनता का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है।

अस्तित्व बचाने की दुहाई देव बिरसा सेना के नेताओं ने सरकार से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उनका मानना है कि यदि प्रशासन और सरकार ने इस सफेदपोश धर्मांतरण पर लगाम नहीं लगाई, तो दक्षिण गुजरात की सदियों पुरानी जनजातीय संस्कृति और पहचान पूरी तरह मिट जाएगी। विधायक का पादरियों के प्रति झुकाव न केवल एक राजनीतिक विवाद है, बल्कि यह आदिवासी समाज की उन जड़ों पर प्रहार है, जिन्हें बचाने की शपथ उन्होंने पद संभालते समय ली थी।

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