होर्मुज़ संकट के बीच ट्रंप का यू-टर्न: ईरान पर हमलों पर 6 अप्रैल तक लगी ब्रेक
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वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के एनर्जी और बिजली संयंत्रों पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को 6 अप्रैल 2026 तक टालने की घोषणा की है। यह अचानक लिया गया फैसला मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़े रणनीतिक बदलाव की ओर इशारा कर रहा है।

हमलों को टालने के पीछे क्या है असली वजह? ट्रंप ने अपने सोशल प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर जानकारी दी कि ईरानी सरकार के विशेष अनुरोध पर यह फैसला लिया गया है। उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच बातचीत की प्रक्रिया बहुत अच्छी चल रही है। माना जा रहा है कि पर्दे के पीछे (बैकचैनल) कूटनीति सक्रिय है, जो इस विनाशकारी सैन्य टकराव को फिलहाल रोकने की कोशिश कर रही है।

अल्टीमेटम से कूटनीति तक का सफर याद दिला दें कि 22 मार्च को ट्रंप ने ईरान को कड़ा अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर ईरान ने 48 घंटे के भीतर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को नहीं खोला, तो अमेरिका उसके बिजली संयंत्रों को तबाह कर देगा। पहले हमलों में 5 दिन की देरी की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 10 दिन कर दिया गया है।

ईरान का रुख: क्या युद्ध अभी थमा है? ट्रंप के दावे के उलट, ईरान की प्रतिक्रिया काफी मिश्रित है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार ने युद्ध रोकने की कोई औपचारिक योजना नहीं बनाई है। ईरान का कहना है कि भविष्य में किसी भी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ उन्हें गंभीर गारंटी चाहिए और पिछले नुकसान की भरपाई भी आवश्यक है।

विशेषज्ञों की क्या है राय? रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह 10 दिन की मोहलत सिर्फ एक अस्थायी युद्धविराम हो सकता है। अमेरिका और इजराइल ने पिछले कई हफ्तों से ईरान की आर्थिक और सैन्य रीढ़ तोड़ने के लिए लगातार हमले किए हैं। यह रोक संघर्ष को बड़े युद्ध में बदलने से तो बचा सकती है, लेकिन मिडिल ईस्ट के नाजुक हालात अभी भी किसी भी वक्त भड़क सकते हैं।

क्या है मिडिल ईस्ट का भविष्य? एक तरफ ट्रंप का दावा है कि ईरान समझौते के लिए मिन्नतें कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरानी अधिकारियों का अपनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प कूटनीतिक हल की राह में सबसे बड़ी बाधा है। फिलहाल 6 अप्रैल की तारीख तक दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह खामोशी किसी स्थायी शांति का आधार बनेगी या यह सिर्फ एक बड़े तूफान से पहले की शांति है।

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