जंग के बीच इंसानियत की मिसाल: भारतीय बच्चों के गुल्लक ने जीता ईरान का दिल
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ईरान इस वक्त एक भीषण युद्ध के दौर से गुजर रहा है। इजरायल और अमेरिका के साथ चल रही लड़ाई में ईरान की बुनियादी संरचना, ऊर्जा संयंत्र और रिहायशी इलाके तबाह हो चुके हैं। हर तरफ बम और मिसाइलों की गूंज है। ऐसी कठिन परिस्थितियों में, भारत के बच्चों ने अपने नन्हे हाथों से इंसानियत की एक ऐसी तस्वीर पेश की है, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है।

भारतीय बच्चों का प्यार भरा तोहफा

जम्मू-कश्मीर समेत भारत के कई हिस्सों में बच्चों ने अपनी बचत का गुल्लक तोड़कर ईरान के पीड़ित बच्चों के लिए आर्थिक मदद भेजी है। भारत में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर इस भावुक पल की एक तस्वीर साझा की है। दूतावास ने इसे प्यार भरा तोहफा बताते हुए कहा है कि इन नन्हे बच्चों की दया को ईरान कभी नहीं भूलेगा।

मिसाइलों पर लिखा थैंक यू इंडिया

इस समर्थन के प्रति आभार जताते हुए ईरान ने एक अनोखा कदम उठाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल पर दागी गई ईरान की मिसाइलों पर थैंक यू इंडिया लिखा गया है। ईरानी सेना ने स्पष्ट किया है कि यह उन देशों के प्रति सम्मान है जिन्होंने युद्ध के इस संकट में ईरान का साथ दिया है।

युद्ध के मैदान में भारी तबाही

ईरानी रेड क्रिसेंट के आंकड़ों के मुताबिक, देश में 92 हजार से अधिक नागरिक इमारतों को नुकसान पहुंचा है। रिहायशी घरों के अलावा स्कूल, अस्पताल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी हमले की चपेट में आए हैं। हाल ही में, अमेरिका और इजरायल ने ईरान के दो प्रमुख स्टील प्लांट्स—खुजेस्तान और इस्फहान स्थित मोबारेकेह फैक्ट्री—को एयरस्ट्राइक में निशाना बनाया है।

अमेरिका की चेतावनी और ईरान का कड़ा रुख

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिए हैं कि यह युद्ध अब अपने अंतिम चरण में है और हफ्तों में खत्म हो सकता है। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलहाल जमीनी सेना भेजने की योजना नहीं बना रहा है। दूसरी ओर, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने गलती से भी जमीनी सेना उतारी, तो हालात नियंत्रण से बाहर हो जाएंगे।

जंग के जख्म: 303 अमेरिकी सैनिक घायल

युद्ध केवल ईरान में ही नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए भी भारी पड़ रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक 303 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें से अधिकांश को ईरान के ड्रोन हमलों के कारण ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी हुई है। इस बीच, होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखना और युद्ध के बाद की शांति बहाल करना अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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