असम विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अंदर का असंतोष ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा है। टिकट नहीं मिलने से नाराज कई मौजूदा विधायकों और दावेदारों ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की चेतावनी दे दी है। बीजेपी की लिस्ट में नए चेहरों और दल-बदलुओं को दी गई प्राथमिकता ने पुराने कार्यकर्ताओं के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
कांग्रेस-बीजेपी बनने का आरोप टिकट बंटवारे से सबसे ज्यादा नाराजगी दिसपुर सीट पर दिख रही है, जहां वरिष्ठ नेता जयंत दास ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। जयंत दास का आरोप है कि बीजेपी अब पूरी तरह से कांग्रेस-बीजेपी बन गई है, जिसमें पुराने निष्ठावान नेताओं को दरकिनार कर हाल ही में कांग्रेस से आए चेहरों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
ऐसी ही स्थिति न्यू गुवाहाटी, गुवाहाटी सेंट्रल और बिहपुरिया जैसी सीटों पर भी बनी हुई है, जहां समर्थकों ने पार्टी की कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
19 विधायकों का कटा टिकट, परिसीमन बना बड़ा कारण बीजेपी नेतृत्व ने इस बार 19 मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि 2023 के परिसीमन (सीटों के पुनर्निर्धारण) के कारण कई समीकरण बदले हैं, जिसके चलते कड़े फैसले लेने पड़े। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पार्टी में 1,400 लोगों ने टिकट की दावेदारी की थी, और सभी को समायोजित करना संभव नहीं था।
हिमंत का डैमेज कंट्रोल मिशन नाराज नेताओं को मनाने के लिए खुद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया मैदान में उतरे हैं। अतुल बोरा जैसे वरिष्ठ नेता, जो निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में थे, उन्हें मनाने के लिए सीएम ने उनके घर जाकर बातचीत की है। हिमंत का तर्क है कि कभी-कभी टिकट कटने के बाद भाग्य और भी बड़े अवसर लेकर आता है।
क्या बागी बिगाड़ेंगे बीजेपी का खेल? बीजेपी की रणनीति नए सामाजिक समीकरणों और फ्रेश चेहरों पर दांव लगाने की है। हालांकि, पार्टी के सामने असली खतरा विपक्ष से ज्यादा वोट कटवा बागी उम्मीदवार हैं। यदि बागी नेता निर्दलीय चुनाव लड़ते हैं, तो यह बीजेपी के कोर वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकता है।
बीजेपी ने कुल 90 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें 28 वे नेता हैं जो हाल ही में कांग्रेस छोड़कर आए हैं। 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले यह डैमेज कंट्रोल पार्टी के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। अब देखना यह है कि हिमंत बिस्वा सरमा की कूटनीति इस आंतरिक कलह को थाम पाती है या नहीं।
#WATCH दीमा हसाओ (असम): असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, हमारी क्षमता 160 तक सीटें जीतने की है। अभी चुनाव प्रचार शुरू नहीं हुआ है। 26 मार्च से मेरी रैली शुरू होंगी तब सीटों का अंदाज लग पाएगा...किसी की भी टिकट कट सकती है। कभी कभी टिकट कटने के बाद भाग्य खुल जाता है… pic.twitter.com/MLic1lX0Rg
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 22, 2026
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