ईरान के सबसे बड़े गैस फील्ड पर हमला: वैश्विक ऊर्जा बाजार में कोहराम, भारत की जेब पर पड़ेगा सीधा असर
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मध्य पूर्व में जारी तनाव एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान के दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड साउथ पार्स (South Pars Gas Field) को निशाना बनाया है। इस हमले ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को हिलाकर रख दिया है।

कीमतों में बेतहाशा उछाल हमले की खबर फैलते ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खलबली मच गई। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जो एक ही दिन में 5% से अधिक की बढ़ोतरी है। वहीं, ब्रिटेन में गैस की कीमतें भी 143.53 पेंस प्रति थर्म के स्तर को छू गई हैं।

कहां और कैसे हुआ नुकसान? यह हमला ईरान के बुशेहर प्रांत के असालुयेह में स्थित ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुआ। पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, गैस पाइपलाइनों और प्रोसेसिंग यूनिट्स को निशाना बनाया गया, जिसके बाद वहां भीषण आग लग गई। हालांकि नुकसान का सटीक आकलन अभी जारी है, लेकिन कई यूनिट्स के ठप होने की पुष्टि हो चुकी है।

ईरान की पलटवार की धमकी हमले के बाद ईरान ने खुली चेतावनी दी है। तेहरान ने कहा है कि वह खाड़ी देशों के प्रमुख ऊर्जा ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। ईरान की सूची में सऊदी अरब की सैमरेफ रिफाइनरी, यूएई का अल होसन गैस फील्ड और कतर के रास लाफान व मेसईद जैसे महत्वपूर्ण प्लांट शामिल हैं। इससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध का खतरा गहरा गया है।

ग्लोबल गैस सप्लाई पर संकट साउथ पार्स गैस फील्ड दुनिया का सबसे बड़ा गैस भंडार है। यहां से होने वाली गैस आपूर्ति में रुकावट का सीधा असर वैश्विक LNG उपलब्धता पर पड़ा है। जानकारों के अनुसार, हमले से ग्लोबल LNG सप्लाई का करीब 20% हिस्सा प्रभावित हुआ है, जिससे आने वाले दिनों में ईंधन की भारी किल्लत हो सकती है।

भारत पर मंडराया महंगाई का खतरा भारत के लिए यह स्थिति बेहद नाजुक है। भारत अपनी LNG जरूरतों के लिए कतर पर काफी हद तक निर्भर है। इस हमले के कारण भारत के लिए आयात बिल में भारी बढ़ोतरी निश्चित है।

  1. पेट्रोल-डीजल और गैस: वैश्विक कीमतों में तेजी का असर जल्द ही भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG/PNG) की कीमतों पर दिखेगा।
  2. आयात लागत: भारत अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से मंगाता है। सप्लाई चेन बाधित होने से परिवहन और लॉजिस्टिक्स महंगा होगा।
  3. महंगाई की मार: कच्चे तेल और गैस की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर रोजमर्रा की जरूरी चीजों की लागत बढ़ाएंगी, जिससे आम आदमी पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

आगे क्या होगा? अगर यह सैन्य तनाव नहीं थमा, तो विशेषज्ञों का अनुमान है कि कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर सकती है। दुनिया के महत्वपूर्ण तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ती हलचल ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है, जो आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़े संकट का संकेत है।

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