मैहर स्थित प्रसिद्ध माँ शारदा देवी मंदिर में चैत्र नवरात्रि 2026 के दौरान दर्शन की व्यवस्था पूरी तरह बदल गई है। मंदिर प्रबंधन समिति ने इस बार मेले के दौरान VIP दर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का बड़ा निर्णय लिया है। 19 से 27 मार्च 2026 तक चलने वाले इस मेले में अब वीआईपी और आम श्रद्धालु के बीच कोई अंतर नहीं होगा।
प्रशासन की अपील: VIP सुविधाओं की मांग न करें मंदिर प्रशासक दिव्या पटेल ने स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि नवरात्रि के दौरान कोई भी जनप्रतिनिधि या विशिष्ट अतिथि VIP दर्शन की मांग न करे। समिति का उद्देश्य है कि लाखों की संख्या में पहुंचने वाले आम श्रद्धालुओं को कतार में घंटों इंतजार न करना पड़े और सभी को समान रूप से माँ के दर्शन सुलभ हों। सभी से सामान्य कतार में लगकर दर्शन करने की अपील की गई है।
पवित्रता बनाए रखने के लिए मांस-मछली की बिक्री पर प्रतिबंध प्रशासन ने माँ शारदा धाम की धार्मिक शुचिता का ध्यान रखते हुए कड़े कदम उठाए हैं। 19 मार्च से 27 मार्च तक पूरे मैहर नगर पालिका क्षेत्र में मांस, मछली और अंडे की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। SDM दिव्या पटेल ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। इन नौ दिनों के दौरान शहर में किसी भी प्रकार के मांसाहारी उत्पादों के क्रय-विक्रय की अनुमति नहीं होगी।
सुरक्षा और यातायात के विशेष इंतजाम लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात की चाक-चौबंद व्यवस्था की है। त्रिकूट पर्वत पर स्थित मंदिर तक जाने वाले मार्ग और परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया है। अधिकारियों का दावा है कि इस बार मेले के दौरान श्रद्धालुओं को बीते वर्षों की तुलना में अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित अनुभव मिलेगा।
शक्तिपीठ की महिमा मैहर का माँ शारदा मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि यहाँ देवी सती का हार गिरा था, जिसके कारण इसे माई का हार या मैहर कहा जाता है। ज्ञान की देवी माँ सरस्वती का यह मंदिर अपनी भव्यता और आस्था के लिए विश्व प्रसिद्ध है। त्रिकूट पर्वत पर स्थित इस मंदिर तक पहुँचने के लिए श्रद्धालु 1063 सीढ़ियों की चढ़ाई कर माँ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
जय माता की!
— Madhya Pradesh Tourism (@MPTourism) October 3, 2024
शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर आइए आपको मैहर स्थित माँ शारदा माता मंदिर के दर्शन कराते हैं। ज्ञान की देवी माँ सरस्वती को समर्पित यह मंदिर शक्तिपीठों में से एक है। देवी सती के गले का हार यहाँ गिरने के कारण इसका नाम माई का हार के आधार पर मैहर पड़ा। त्रिकूट पर्वत पर… pic.twitter.com/BYsIuRE0lD
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