मिडिल ईस्ट में आसमानी राक्षस और ऑक्टोपस का पहरा, ईरान पर मंडराया दोहरी मार का खतरा
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मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ब्रिटेन ने अपनी सैन्य घेराबंदी तेज कर दी है। ईरान को घेरने के लिए अमेरिका ने अपनी घातक हवाई शक्ति को सक्रिय किया है, तो ब्रिटेन भी अपने अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम को तैनात करने की तैयारी में है। यह कदम ईरान की सैन्य क्षमताओं को पंगु बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

आसमानी राक्षस B-52 की दस्तक

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अपने रणनीतिक बमवर्षक विमान B-52 Stratofortress को नाइट मिशन पर रवाना किया है। यह विमान परमाणु और पारंपरिक, दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है। आठ टर्बोफैन इंजन वाला यह आसमानी राक्षस बिना रुके 14,000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है, जो ईरान के लिए एक बड़ी चेतावनी है।

ब्रिटेन का ऑक्टोपस करेगा ड्रोन का शिकार

ब्रिटेन भी अब इस जंग में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, कीर स्टारर्मर सरकार ऑक्टोपस एंटी-ड्रोन सिस्टम को मध्य पूर्व भेजने पर विचार कर रही है। इसे मूल रूप से यूक्रेन को रूसी हमलों से बचाने के लिए विकसित किया गया था। अब इसका उपयोग ईरान के घातक शाहेद ड्रोन हमलों को नाकाम करने के लिए किया जा सकता है।

अमेरिका की नौसैनिक घेराबंदी

हवा के साथ-साथ समुद्र में भी अमेरिका ने ताकत बढ़ा दी है। फारस की खाड़ी में पहले से ही दो एयरक्राफ्ट कैरियर मौजूद हैं और तीसरा मेडिटेरेनियन में तैनात है। इसके अलावा, जापान से यूएसएस त्रिपोली को भी ईरान के करीब पहुंचने का आदेश दिया गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री रास्तों की सुरक्षा के लिए अपनी नौसैनिक ताकत बढ़ाने की अपील की है।

ईरान का पलटवार और तल्ख तेवर

ईरान ने भी पीछे हटने से इनकार कर दिया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने साफ कहा है कि क्षेत्र में शांति के लिए अमेरिका को पश्चिम एशिया छोड़ना होगा। वहीं, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सऊदी अरब स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर मिसाइलों की बौछार कर दी है। हालांकि, सऊदी डिफेंस सिस्टम ने इन हमलों को विफल कर दिया।

वैश्विक संकट की आहट

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता यह संघर्ष अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए खतरा बन गया है। दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने से दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इस सैन्य जमावड़े का सीधा मकसद ईरान की सैन्य क्षमता को भविष्य के लिए खत्म करना बताया जा रहा है।

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