सोनम वांगचुक की रिहाई पर मजीद मेमन का तंज: क्या NSA के सबूत हवा में उड़ गए?
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लद्दाख के पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) को गृह मंत्रालय द्वारा वापस लिए जाने के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व सांसद मजीद मेमन ने इसे सरकार की सोची-समझी दमनकारी नीति करार दिया है।

क्या सबूत हवा में गायब हो गए? मजीद मेमन ने सरकार से तीखा सवाल किया है कि यदि वांगचुक वास्तव में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा थे, तो उन्हें रिहा क्यों किया गया? उन्होंने पूछा, क्या उन पर लगाए गए आरोप और सबूत हवा में गायब हो गए? या फिर वे सबूत थे ही नहीं और केवल सरकार से असहमति जताने की सजा उन्हें दी गई थी?

मेमन के अनुसार, सरकार असहमति की आवाजों को दबाने के लिए कड़े कानूनों का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी ठोस आधार के किसी भी सामाजिक कार्यकर्ता को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है।

चुनावी फायदे के लिए एजेंसियों का इस्तेमाल सोनम वांगचुक प्रकरण के बहाने मेमन ने भाजपा के चुनावी मिशन पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा का एकमात्र लक्ष्य किसी भी तरह से राज्यों में सत्ता हासिल करना है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का सक्रिय होना इस बात का प्रमाण है कि पार्टी विपक्ष को खत्म करने की कोशिश कर रही है।

संघीय ढांचे के लिए खतरा मेमन ने चेतावनी दी कि भाजपा का भगवाकरण का एजेंडा देश के संघीय ढांचे के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्रीय दलों और उनके नेतृत्व को निशाना बनाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है।

पूर्व सांसद ने अंत में कहा कि जनता सब देख रही है। उन्होंने संकेत दिया कि सत्ता के नशे में संवैधानिक संस्थाओं का इस तरह इस्तेमाल करना आने वाले चुनावों में भाजपा के लिए भारी पड़ सकता है।

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