बांग्लादेश: ढाका में हिंदू महिला से बर्बरता का आरोप, पुलिस की टिप्पणी पर बढ़ा विवाद
News Image

ढाका: बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा एक बार फिर वैश्विक चर्चा का विषय बन गई है। राजधानी ढाका के मीरपुर इलाके में एक हिंदू महिला, श्रीमती रीता रानी के घर में घुसकर उनके साथ कथित तौर पर बर्बर मारपीट की गई है। इस घटना ने देश में कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राजनीतिक संरक्षण और हमले का आरोप वरिष्ठ पत्रकार सलाहुद्दीन शोएब चौधरी के अनुसार, इस हमले का नेतृत्व जातीयताबादी स्वेच्छासेवक दल (BNP से संबद्ध) की मीरपुर इकाई के संयोजक फिरोज ने किया। आरोप है कि फिरोज और उसके साथियों ने घर में घुसकर महिला को बुरी तरह प्रताड़ित किया। घटना की तस्वीरें और दांव सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

पुलिस पर पीड़ित को ही दोषी ठहराने का आरोप चौंकाने वाला दावा यह है कि जब पीड़ित महिला न्याय की गुहार लेकर मीरपुर थाने पहुंची, तो पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया। आरोप है कि थाने के अधिकारी ने महिला की सुंदरता को ही उनके उत्पीड़न की वजह बताया और उन्हें सुरक्षित रहने के लिए बुर्का पहनने की सलाह दी। इस घटना ने पुलिस की संवेदनशीलता और निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।

पुलिस का पक्ष: रिकॉर्ड में ऐसी कोई शिकायत नहीं विवाद के बीच, ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने 7 नवंबर को अपना पक्ष रखा। पुलिस का कहना है कि मीरपुर डिवीजन के सभी सात थानों की शुरुआती जांच में ऐसी किसी शिकायत या घटना का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। पुलिस फिलहाल महिला की पहचान और वायरल हो रही तस्वीरों की सच्चाई का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

बढ़ता कट्टरपंथ और सुरक्षा का सवाल अगस्त 2024 के राजनीतिक बदलाव के बाद से बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों का प्रभाव बढ़ा है, जिससे हिंदू समुदाय में डर का माहौल है। जानकारों का कहना है कि क्या अब बांग्लादेश में हिंदू महिलाओं को सुरक्षित रहने के लिए अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर बुर्का पहनना पड़ेगा? यह सवाल अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

पुरानी घटनाओं ने बढ़ाई चिंता बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले दिसंबर 2025 में मयमनसिंह में दीपु चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या करना और उनके शव को पेड़ से लटकाकर जलाने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। बार-बार होती ऐसी घटनाएं यह बताती हैं कि वहां भीड़तंत्र किस हद तक कानून को अपने हाथ में ले रहा है।

फिलहाल, रीता रानी के मामले में पुलिस की जांच जारी है, लेकिन नागरिक समाज और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात की मांग कर रहे हैं कि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

फुटेज मांगे जाने पर यही कहा जाता है कि उपलब्ध नहीं — यूपी पुलिस पर भड़का इलाहाबाद हाई कोर्ट

Story 1

अभिषेक बनर्जी के जन्मदिन पर आधी रात को कालीघाट में बवाल: आवास के बाहर TMC-BJP समर्थकों में हिंसक झड़प

Story 1

ईरान के परमाणु सीक्रेट खोलिए और घर ले जाइए ₹188 करोड़! अमेरिका ने बिछाया जासूसों का जाल

Story 1

दिवाली का अनूठा तोहफा: व्यापारी ने थाली में सजाकर बांटे लाखों रुपये, वर्कर्स की आंखें हुईं नम

Story 1

लखनऊ में खाकी के साये में लैंड जिहाद : पुलिस स्टेशन की दीवार से सटकर खड़ी हो रही अवैध दरगाह

Story 1

13,629 फीट की ऊंचाई पर विमानन का नया इतिहास: भारतीय वायुसेना के IL-76MD ने न्योमा में भरी उड़ान

Story 1

न थकेंगे न रुकेंगे! बॉर्डर की सुरक्षा के लिए तैनात हुए भारतीय सेना के रोबोटिक डॉग्स

Story 1

यवतमाल में ‘काली दिवाली’: रोहित पवार ने सरकार को घेरा, प्रति हेक्टेयर 1 लाख मुआवजे की मांग

Story 1

जब ट्रैक्टर का हुआ फॉर्च्यूनर अवतार, अनोखे मॉडिफिकेशन ने इंटरनेट पर मचाया तहलका

Story 1

बाबरी विध्वंस पर सोनिया गांधी के आंसुओं पर गरमाई सियासत, बीजेपी का तीखा पलटवार