इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि राज्य में नागरिक अधिकारों की स्थिति बेहद चिंताजनक है और पुलिस नागरिकों की स्वतंत्रता के प्रति पूरी तरह उदासीन है।
क्या है बिजनौर का यह मामला? यह मामला बिजनौर के अफजल अहमद से जुड़ा है। अफजल की बेटी ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके पिता को 5 सितंबर 2026 को हिरासत में लिया, लेकिन उनकी औपचारिक गिरफ्तारी दो दिन बाद 7 सितंबर को दिखाई गई। यह दो दिन की अवधि गैरकानूनी हिरासत का सीधा मामला थी।
पुलिस का पुराना बहाना और कोर्ट की फटकार सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सच जानने के लिए 5 से 7 सितंबर तक का CCTV फुटेज मांगा। जवाब में पुलिस ने दावा किया कि भारी बारिश के कारण LAN केबल खराब हो गई थी, जिससे CCTV सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया था।
कोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, एक के बाद एक कई मामलों में जब भी कोर्ट फुटेज मांगती है, तो यही जवाब मिलता है कि वह उपलब्ध नहीं है। यह पुलिस का बचाव का जरिया नहीं बन सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि फुटेज गायब मिलता है, तो अदालत यह मान लेगी कि हिरासत गैरकानूनी थी और सच छिपाने के लिए सबूत नष्ट किए गए हैं।
SHO पर गिरी गाज, सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज होगी नाराजगी अदालत ने बिजनौर की SHO अन्नू कुमारी की भूमिका को संदिग्ध माना। कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि उन्होंने जानबूझकर फुटेज उपलब्ध नहीं कराए ताकि सच्चाई सामने न आ सके। बेंच ने आदेश दिया कि पुलिसकर्मी के खिलाफ कोर्ट की नाराजगी को उनके सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए। साथ ही, सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह अधिकारी की पद पर बने रहने की योग्यता की समीक्षा करे।
पीड़ित को बड़ी राहत अदालत ने तत्काल प्रभाव से अफजल अहमद को रिहा करने का आदेश दिया (यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित न हों)। साथ ही, राज्य सरकार को आदेश दिया गया कि वह पीड़ित को 7 दिनों के भीतर 20,000 रुपये का मुआवजा प्रदान करे। यह फैसला उन पुलिस अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो हिरासत के नियमों का उल्लंघन कर सीसीटीवी के बहाने बच निकलते हैं।
*STORY | Allahabad HC directs FIR registration against IO for fabricating reasons of arrest
— Press Trust of India (@PTI_News) November 6, 2026
The Allahabad High Court has directed the Farrukhabad superintendent of police to register an FIR against an investigating officer, after finding that he appeared to have inserted… pic.twitter.com/4APeLr2EOs
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