महाराष्ट्र के आनंदवन में कुष्ठरोगियों के पुनर्वास और सेवा की नींव रखने वाले बाबा आमटे का नाम आज भी सेवा के पर्याय के रूप में लिया जाता है। अब उनके बेटे डॉ. विकास आमटे को एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय निमंत्रण मिला है, जिसने उनकी सामाजिक सेवा की विरासत को फिर से वैश्विक पटल पर गौरवान्वित किया है।
क्या है यह सम्मान? जॉर्डन के अम्मान सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स स्टडीज (ACHRS) ने डॉ. विकास आमटे को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार पुरस्कार विजेताओं के विशिष्ट नेटवर्क (Laureates Network) में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। यह निमंत्रण उनके द्वारा समाज के वंचित वर्गों के लिए किए जा रहे निरंतर कार्यों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता माना जा रहा है।
फडणवीस ने जताया गर्व महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया पर इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि यह न केवल आमटे परिवार के लिए, बल्कि पूरे महाराष्ट्र के लिए गर्व का क्षण है। फडणवीस ने इस अवसर पर बाबा आमटे के 1988 में मिले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार पुरस्कार की यादें भी ताजा कीं।
बाबा आमटे का ऐतिहासिक योगदान बाबा आमटे को मानवाधिकारों के संरक्षण और वंचितों के उत्थान के लिए 1988 में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिष्ठित मानवाधिकार पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने अपना पूरा जीवन उन कुष्ठरोगियों के नाम कर दिया, जिन्हें समाज ने बहिष्कृत कर दिया था। उन्होंने न केवल उनका इलाज किया, बल्कि उन्हें शिक्षा और कौशल देकर आत्मनिर्भर बनाने का बीड़ा उठाया।
आनंदवन: एक प्रेरणादायक सफर वर्ष 1949 में चंद्रपुर जिले के वरोरा में बाबा आमटे ने आनंदवन की स्थापना की थी। उस समय कुष्ठरोगियों को समाज से अलग-थलग कर दिया जाता था। बाबा आमटे ने इस सोच को बदला और आनंदवन को एक ऐसे केंद्र के रूप में विकसित किया, जहाँ कुष्ठ प्रभावित लोग खेती, छोटे उद्योगों और शिक्षा के जरिए सम्मान के साथ जीवन जी सकें।
विरासत को आगे बढ़ा रहे डॉ. विकास आमटे बाबा आमटे के जाने के बाद, उनके बेटे डॉ. विकास आमटे इस महान कार्य को पूरी निष्ठा से आगे बढ़ा रहे हैं। महारोगी सेवा समिति के सचिव के रूप में वे आज भी स्वास्थ्य, पुनर्वास और सामाजिक विकास के कार्यों का नेतृत्व कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह निमंत्रण किसी नए पुरस्कार का हिस्सा नहीं, बल्कि पूर्व पुरस्कार विजेताओं के उस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ने का अवसर है जो वैश्विक शांति और मानवाधिकारों के लिए काम करता है।
Dr. Vikas Amte Invited to Join UN Human Rights Prize Laureates Network: A Global Recognition for Maharashtra’s Timeless Legacy!
— Devendra Fadnavis (@Dev_Fadnavis) November 7, 2026
Padma Vibhushan Baba Amte holds a special place in history as the first Indian recipient of the United Nations Human Rights Prize in 1988.
Now,… pic.twitter.com/2ZDRCgJNTO
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