गोकुल चुनाव के बीच महाराष्ट्र सरकार का बड़ा दांव: सहकारी संस्थाओं के बोर्ड में अब सरकारी विशेषज्ञ करेंगे वोट
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महाराष्ट्र की राजनीति में सहकारी संस्थाओं, विशेषकर गोकुल दूध संघ के चुनावों को लेकर गहमागहमी के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। सरकार ने एक नया अध्यादेश जारी कर सहकारी संस्थाओं के कामकाज में अपनी सीधी दखल और निगरानी का दायरा बढ़ा दिया है।

अध्यादेश का मुख्य सार: बोर्ड में 5 नए चेहरे महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र सहकारी संस्था (सुधारणा) अध्यादेश, 2026 जारी किया है। इसके तहत 500 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर और सरकारी सहायता प्राप्त करने वाली संघीय सहकारी संस्थाओं के बोर्ड में अब सरकार 5 सदस्य नामित करेगी। इसमें चार विशेषज्ञ और एक सरकारी अधिकारी शामिल होंगे।

किसे मिलेगा वोटिंग का पावर? इस नए नियम का सबसे अहम हिस्सा वोटिंग अधिकार है। सरकार द्वारा नियुक्त किए गए चार विशेषज्ञ सदस्य बोर्ड मीटिंग में मतदान कर सकेंगे। हालांकि, नियुक्त किए गए सरकारी अधिकारी को वोट देने का अधिकार नहीं होगा। साथ ही, ये नामित सदस्य अध्यक्ष या उपाध्यक्ष जैसे प्रमुख पदों पर नहीं बैठ सकेंगे।

कौन सी संस्थाएं आएंगी दायरे में? नियम उन संस्थाओं पर लागू होगा जो सरकार से किसी भी रूप में (जैसे शेयर पूंजी, कर्ज, सरकारी जमीन या अनुदान) सहायता ले रही हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि राज्य के जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों को इस दायरे से बाहर रखा गया है।

सरकार का पक्ष: पेशेवर कामकाज या राजनीतिक दबाव? सरकार का तर्क है कि भारी टर्नओवर वाली इन संस्थाओं के कामकाज को अधिक पारदर्शी और पेशेवर बनाने के लिए विशेषज्ञ जरूरी हैं। विधानमंडल सत्र में न होने के कारण इसे राज्यपाल की मंजूरी के साथ तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

गोकुल चुनाव पर क्या होगा असर? राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को सीधे तौर पर गोकुल दूध संघ के आगामी चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। चूंकि गोकुल एक बड़ी सहकारी संस्था है, इसलिए विशेषज्ञों की नियुक्ति और उनके पास वोटिंग पावर होना बोर्ड के फैसलों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह संस्था के वर्तमान टर्नओवर और सरकारी शर्तों पर निर्भर करेगा।

यह अध्यादेश महाराष्ट्र की सहकारी राजनीति में सत्ता पक्ष की पकड़ मजबूत करने की एक बड़ी कवायद मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि विपक्षी दल इसे पारदर्शिता का नाम देते हैं या सत्ता का दुरुपयोग।

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