स्कूली शिक्षा में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। NCERT ने 9वीं कक्षा के सोशल साइंस के पाठ्यक्रम में पर्सनल फाइनेंस (व्यक्तिगत वित्त) का एक नया चैप्टर शामिल किया है। अब छात्र क्लासरूम में ही सीखेंगे कि क्रेडिट कार्ड, EMI और निवेश कैसे काम करते हैं।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य और अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने इस पहल का स्वागत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि नई किताब में जोखिम लेने, नवाचार (innovation) और व्यापार को एक सकारात्मक गतिविधि के रूप में दिखाया गया है। यह पुरानी किताबों के उस नजरिए से बिल्कुल अलग है, जिनमें अक्सर इन चीजों को जमाखोरी या ब्लैक-मार्केटिंग के तौर पर पेश किया जाता था।
NCERT ने अपनी कक्षा 9 की सोशल साइंस की किताब अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड (भाग-2) के अर्थशास्त्र वाले हिस्से में यह बदलाव किया है। नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत तैयार की गई इस किताब का उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें व्यवहारिक जीवन के लिए तैयार करना है।
इस चैप्टर में वित्तीय साक्षरता के पांच अहम पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है:
इस बदलाव का उद्देश्य 14-15 साल के बच्चों को रातों-रात निवेशक बनाना नहीं है। इसके बजाय, यह कोशिश है कि वे पैसों की भाषा को समझ सकें। छात्र यह सीख सकेंगे कि उनके वित्तीय फैसलों का भविष्य में क्या असर पड़ता है। इससे वे भविष्य में बेहतर और सोच-समझकर आर्थिक निर्णय लेने में सक्षम बनेंगे।
सिर्फ बचत ही नहीं, इस किताब में एंटरप्रेन्योरशिप यानी उद्यमिता पर भी जोर दिया गया है। छात्र इसमें प्रॉफिट-लॉस अकाउंट (लाभ-हानि खाता) और बिजनेस प्लान बनाने जैसी बुनियादी बातें सीखेंगे। यह छात्रों में व्यापारिक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
There is also a chapter on entrepreneurship in the Grade 9 Social Science Part 2. It explains basics of profit & loss account, business plans and so. Most importantly, it presents risk-taking, innovation and business as a positive activity - quite different from how previous… pic.twitter.com/X9DgjOXgAN
— Sanjeev Sanyal (@sanjeevsanyal) November 3, 2026
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