योग टीचर से अमेरिका की विधायक तक: बुलंदशहर की बेटी सबा हैदर ने रच दिया इतिहास
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अमेरिका में हालिया चुनावों में भारतवंशियों ने अपनी मजबूत छाप छोड़ी है। इस फेहरिस्त में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से नाता रखने वाली सबा हैदर का नाम चमक रहा है। सबा ने इलिनॉय के 84वें हाउस डिस्ट्रिक्ट से जीत दर्ज कर एक नया इतिहास रच दिया है। वह इलिनॉय विधानसभा के लिए चुनी जाने वाली पहली दक्षिण एशियाई महिला बन गई हैं।

बुलंदशहर से अमेरिका तक का सफर सबा हैदर का परिवार मूल रूप से बुलंदशहर के औरंगाबाद कस्बे का रहने वाला है। उनके पिता सैयद अली हैदर एक इंजीनियर हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई गाजियाबाद के होली चाइल्ड स्कूल से हुई, जिसके बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) से वाइल्डलाइफ साइंस में एमएससी की और गोल्ड मेडल हासिल किया। बचपन से ही सबा भाषण और बहस प्रतियोगिताओं में काफी सक्रिय थीं।

योग टीचर से राजनीति में एंट्री 2007 में अपने पति अली काजमी के साथ अमेरिका शिफ्ट होने के बाद, सबा ने खुद को एक योग शिक्षक के रूप में स्थापित किया। योग सिखाने के दौरान उनका संपर्क विभिन्न समुदायों के लोगों से हुआ, जिससे वे धीरे-धीरे स्थानीय सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों से जुड़ गईं। उन्होंने तय किया कि जिस समुदाय ने उन्हें अपनाया, वे उसे कुछ वापस लौटाना चाहती हैं।

हार नहीं मानी और हासिल की जीत सबा के लिए यह जीत रातों-रात नहीं मिली। 2022 में उन्होंने ड्यूपेज काउंटी बोर्ड का चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और जनता की सेवा में जुटी रहीं। 2024 में उन्होंने फिर से ताल ठोकी और जीत हासिल की। काउंटी बोर्ड में रहते हुए उन्होंने पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।

ऐतिहासिक जीत का आंकड़ा हालिया चुनाव में सबा हैदर ने डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार ब्रायन स्कोपा को भारी मतों के अंतर से हराया। सबा को 70.9 फीसदी यानी 20,756 वोट मिले, जबकि स्कोपा को मात्र 8,520 वोट ही मिल सके।

जनवरी 2027 से शुरू होगा कार्यकाल सबा राज्य की राजधानी स्प्रिंगफील्ड में अपने क्षेत्र (84वें डिस्ट्रिक्ट) का प्रतिनिधित्व करेंगी। उनका विधायी कार्यकाल जनवरी 2027 से शुरू होगा। गाजियाबाद में रह रहे उनके परिजन इस जीत से बेहद उत्साहित हैं। उनके पिता ने इसे न केवल परिवार के लिए, बल्कि भारत के लिए भी गर्व का क्षण बताया है।

सबा हैदर की यह जीत उन सभी के लिए प्रेरणा है, जो यह साबित करना चाहते हैं कि मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है।

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