भारत की पहली बुलेट ट्रेन: 2027 में बदलेगी सफर की तस्वीर, जानें इसकी अनूठी तकनीक और खूबियां
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भारत का बहुप्रतीक्षित बुलेट ट्रेन का सपना अब हकीकत में बदलने के करीब है। साल 2027 में मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर देश की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन दौड़ती नजर आएगी। बेंगलुरु की बीईएमएल (BEML) और इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में इसके कोचों का निर्माण युद्धस्तर पर जारी है।

निर्माण का दौर: स्क्वीज टेस्ट से गुजर रही ट्रेन

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में निर्माण कार्य का जायजा लिया है। वर्तमान में बुलेट ट्रेन की इंटीग्रेटेड कार बॉडी तैयार हो चुकी है और अब इस पर अंतिम चरण के स्क्वीज टेस्ट चल रहे हैं। अगस्त 2027 तक इसके ट्रायल की उम्मीद है, जिसके बाद इसे औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाई जाएगी।

सामान्य पटरियों से क्यों अलग होंगे बुलेट ट्रेन के ट्रैक?

आम ट्रेनें बैलास्ट (पत्थरों वाली) पटरियों पर चलती हैं। लेकिन 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली बुलेट ट्रेन के लिए यह घातक हो सकता है। तेज गति के कारण हवा का दबाव इतना अधिक होगा कि पटरी के पत्थर किसी गोली की तरह उड़कर ट्रेन के नीचे लगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को क्षतिग्रस्त कर सकते हैं। यही कारण है कि बुलेट ट्रेन के ट्रैक पूरी तरह से बैलास्टलैस (बिना पत्थर वाले) होंगे।

क्या है जे-स्लैब टेक्नोलॉजी?

भारत अपनी बुलेट ट्रेन के लिए जापान की प्रसिद्ध शिनकानसेन तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। इसे जे-स्लैब ट्रैक कहा जाता है। इसमें पत्थरों या लकड़ी के स्लीपर के बजाय कंक्रीट के भारी स्लैब का उपयोग किया जाता है।

सुरक्षा कवच: भूकंप की आहट मिलते ही रुकेगी ट्रेन

बुलेट ट्रेन में जापान का अत्याधुनिक अर्थक्वेक वॉर्निंग सिस्टम लगाया जा रहा है। भूकंप के झटके महसूस होते ही यह सिस्टम बिजली की आपूर्ति काट देगा, जिससे इमरजेंसी ब्रेक अपने आप लग जाएंगे और ट्रेन सुरक्षित रूप से झटकों के साथ रुक जाएगी।

बुलेट ट्रेन में मिलेंगी ये सुविधाएं

यह बुलेट ट्रेन दिखने में जितनी आधुनिक है, सुविधाएं भी उतनी ही शानदार हैं:

भविष्य का नक्शा: 8 कॉरिडोर की तैयारी

मुंबई-अहमदाबाद पहला कॉरिडोर है, लेकिन सरकार का लक्ष्य बड़े नेटवर्क का है। देश में कुल 8 बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की योजना है। हाल ही में दिल्ली-वाराणसी-गुवाहाटी कॉरिडोर को भी सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। इसके अलावा दिल्ली-वाराणसी, मुंबई-पुणे और हैदराबाद-बेंगलुरु जैसे मार्ग भी भविष्य में भारत की कनेक्टिविटी का चेहरा बदल देंगे।

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