जनगणना 2027: पहली बार डिजिटल अवतार में देश की गणना, जानें कब और कैसे होगी आपके घर की एंट्री
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देश में 16 साल के लंबे अंतराल के बाद जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 का औपचारिक कार्यक्रम अधिसूचित कर दिया है। यह जनगणना न केवल आबादी का सटीक आंकड़ा देगी, बल्कि कई मायनों में ऐतिहासिक और तकनीकी रूप से उन्नत होगी।

16 साल का इंतजार और डिजिटल क्रांति

भारत में अंतिम जनगणना 2011 में हुई थी। 2021 की जनगणना कोरोना महामारी के कारण टल गई थी। अब 2027 में होने वाली यह 16वीं जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी। पहली बार कागजी फॉर्म की जगह गणनाकर्मी सीधे मोबाइल एप का उपयोग करेंगे, जिससे आंकड़ों में पारदर्शिता और तेजी आएगी।

राज्यों के लिए अलग-अलग शेड्यूल

सरकार ने भौगोलिक और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्यों के लिए अलग-अलग तारीखें तय की हैं:

क्या इस बार जातिगत गणना होगी?

जनगणना 2027 का एक अहम हिस्सा जातिगत डेटा जुटाना है। जहां 2011 में केवल अनुसूचित जाति और जनजाति की गणना हुई थी, वहीं इस बार व्यापक स्तर पर जातियों की गिनती की जाएगी। इन आंकड़ों का उपयोग भविष्य में सामाजिक नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने में किया जाएगा।

घर बैठे खुद कर सकेंगे जनगणना

इस बार सरकार स्व-गणना (Self-Enumeration) का विकल्प दे रही है। नागरिक सरकारी पोर्टल पर लॉग इन करके अपने परिवार का डेटा खुद भर सकेंगे। डेटा सबमिट करने के बाद एक सेल्फ एन्यूमरेशन आईडी जनरेट होगी, जिसे बाद में घर आने वाले सरकारी कर्मचारी को दिखाना होगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह वैकल्पिक है।

डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता

कई लोगों के मन में अपनी व्यक्तिगत जानकारी को लेकर सवाल होते हैं। जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत किसी भी व्यक्ति की निजी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। इसे न तो सार्वजनिक किया जा सकता है, न ही आरटीआई के तहत साझा किया जा सकता है और न ही अदालतों में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

जनगणना क्यों जरूरी है?

यह केवल लोगों की संख्या गिनने की कवायद नहीं है। इसके जरिए सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आवास और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों का आकलन करती है। जनगणना के आंकड़े ही यह तय करते हैं कि किस इलाके में कितनी सुविधाओं और संसाधनों की आवश्यकता है।

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