लद्दाख में पिछले एक सप्ताह से चल रहा महिलाओं का जोरदार विरोध प्रदर्शन आखिरकार रंग लाया है। केंद्र शासित प्रदेश (UT) प्रशासन और महिला प्रतिनिधियों के बीच बनी सहमति के बाद, इस आंदोलन को 5 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
क्या है महिलाओं की मांग? लद्दाख की महिलाएं क्षेत्र में बढ़ती शराब की बिक्री और नई शराब नीति के खिलाफ लामबंद थीं। उनका स्पष्ट रुख है कि लद्दाख को ड्राइव यूनियन टेरिटरी (शराब मुक्त क्षेत्र) घोषित किया जाए। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि उदार शराब लाइसेंसिंग नीति सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रही है।
प्रशासन ने मांगा एक हफ्ते का समय लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा और महिला संगठनों की उच्च-स्तरीय बैठक के बाद प्रशासन ने सभी सुझावों पर सैद्धांतिक सहमति जताई है। गृह विभाग की विशेष सचिव ताशी डोलमा ने लिखित पत्र जारी कर कहा है कि प्रशासन समझौते को अंतिम रूप देने के लिए एक सप्ताह का समय चाहता है।
एकजुट हुए अलग-अलग समुदाय इस विरोध प्रदर्शन की सबसे बड़ी ताकत इसकी एकजुटता रही। लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन, अंजुमन-ए-इमामिया, अंजुमन मोइन-उल-इस्लाम और ईसाई समुदाय की महिला विंग ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला था। लेह के एनडीएस मेमोरियल पार्क में 24 घंटे चलने वाला यह धरना अब प्रशासन के आश्वासन के बाद रोक दिया गया है।
सोनम वांगचुक ने जताई उम्मीद पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर इस घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा मांगें मान लेना एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि व्यवस्था महिलाओं के इस भरोसे और विश्वास का पूरी तरह से सम्मान करेगी।
आगे क्या होगा? 5 नवंबर तक का समय प्रशासन के लिए एक परीक्षा की तरह है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार अपनी लिखित प्रतिबद्धता पूरी करते हुए लद्दाख को शराब मुक्त क्षेत्र घोषित करने की दिशा में ठोस आदेश जारी करती है या नहीं।
*LADAKH WOMEN LEADERS SUSPEND THEIR
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) October 29, 2026
PROTEST AGAINST LIQUOR
After UT Administration agreed to all demands and requested for a week to finalise the agreement.
Let s hope that their trust & faith in the system will be respected.@narendramodi @PMOIndia @AmitShah @AmitShahOffice pic.twitter.com/7hmWOLy3cX
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