कैंसर की दवाएं 90% तक सस्ती: मरीजों के लिए बड़ी राहत, लेकिन 2.16 लाख के इंजेक्शन पर खामोशी क्यों?
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कैंसर का इलाज न केवल शारीरिक, बल्कि परिवार के लिए आर्थिक रूप से भी बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। दवाओं के भारी-भरकम खर्च से कई परिवार कर्ज में डूब जाते हैं। अब केंद्र सरकार के नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने कैंसर मरीजों को बड़ी राहत दी है।

क्या है सरकार का बड़ा फैसला?

NPPA ने 543 ब्रांड की एंटी-कैंसर दवाओं की नई संशोधित अधिकतम खुदरा कीमतें (MRP) जारी की हैं। ये नई दरें 9 नवंबर 2026 से प्रभावी होंगी। सरकार ने 137 नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को 30% तक सीमित करने का निर्णय लिया है, जिससे कीमतों में भारी कटौती हुई है।

40 हजार वाली दवा अब 2720 रुपये में

इस फैसले का असर चौंकाने वाला है। ब्रेस्ट कैंसर में उपयोग होने वाली प्रमुख दवा Palbociclib की कीमत 40,000 रुपये से घटकर महज 2,720 रुपये रह गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कई दवाओं की कीमतों में 70% से 90% तक की गिरावट दर्ज की गई है।

कीमतों में कटौती का गणित: ट्रेड मार्जिन का खेल

अक्सर मरीजों को दवा की निर्माण लागत से कहीं ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है, क्योंकि डिस्ट्रीब्यूटर, स्टॉकिस्ट और रिटेलर स्तर पर भारी मुनाफा (मार्जिन) जुड़ जाता है। NPPA ने ट्रेड मार्जिन रैशनलाइजेशन (TMR) नीति के तहत इसे 30% पर कैप कर दिया है, जिससे बीच के बिचौलियों का अत्यधिक मुनाफा कम हुआ है।

क्या सभी मरीजों को मिलेगी राहत?

यह राहत सभी कैंसर मरीजों के लिए नहीं है। यह लाभ केवल उन 137 नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं पर आधारित इलाज करने वालों को मिलेगा, जिन्हें सरकार ने इस दायरे में लिया है। कैंसर के प्रकार और उपचार के प्रोटोकॉल अलग-अलग होते हैं, इसलिए हर दवा पर एक जैसी कमी की उम्मीद नहीं की जा सकती।

फिर भी महंगी दवाओं का क्या?

अभी भी कई ऐसी लाइफ-सेविंग दवाएं और इंजेक्शन हैं (जैसे 2.16 लाख रुपये तक की कीमत वाले), जिनकी कीमतों में कोई बदलाव नहीं आया है। इसका कारण यह है कि सरकार ने केवल उन दवाओं को दायरे में लिया है जो नॉन-शेड्यूल्ड श्रेणी में आती थीं और जिनमें ट्रेड मार्जिन बहुत अधिक था। विशेष और पेटेंटेड दवाओं की कीमतें अभी भी कंपनियां अपने हिसाब से तय कर रही हैं।

ये दवाएं अब होंगी सस्ती

इस सूची में इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी की प्रमुख दवाएं शामिल हैं, जिनमें:

NPPA ने साफ कर दिया है कि नई कीमतों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों और दवा विक्रेताओं पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कदम दवाओं को किफायती बनाने की दिशा में एक अहम शुरुआत है, लेकिन महंगे इलाज के पूर्ण समाधान के लिए अभी और सुधारों की दरकार है।

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