केरल में लोअर प्राइमरी स्कूल टीचर (LPST) रैंक-होल्डर्स का आंदोलन एक अत्यंत गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। राज्य सचिवालय के बाहर 113 दिनों से डटे इन अभ्यर्थियों का सब्र अब जवाब दे गया है। अपनी मांगों के प्रति सरकार की अनदेखी से नाराज होकर एसोसिएशन की सचिव एस. वलारमथी ने अपना सिर मुंडवा लिया है और आमरण अनशन शुरू कर दिया है।
बारिश में भी जारी है संघर्ष प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें टेंट लगाने की अनुमति तक नहीं दी। इसके कारण महिला शिक्षिकाओं को भरी बारिश में खुले आसमान के नीचे बैठने पर मजबूर होना पड़ा है। वलारमथी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सरकार के इस अमानवीय रवैये की कड़ी निंदा की है।
क्या हैं प्रमुख मांगें? रैंक-होल्डर्स ने सरकार के सामने चार मुख्य मांगें रखी हैं:
सरकार के वादे निकले खोखले यह पहली बार नहीं है जब अभ्यर्थियों को हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा है। अगस्त महीने में शिक्षा मंत्री के आश्वासन के बाद 13 दिनों का अनशन समाप्त किया गया था। सरकार ने मांगों पर गौर करने के लिए 45 दिन का समय मांगा था, लेकिन तय समय बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। मंत्री ने आश्वासन दिया था कि 150 से अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों में हेड टीचर की नियुक्ति PSC के जरिए की जाएगी, लेकिन अब तक यह सिर्फ कागजी दावा बनकर रह गया है।
राजनीतिक घेरेबंदी और चुप्पी पर सवाल यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप भी ले चुका है। सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं कि अन्य छात्र आंदोलनों पर मुखर रहने वाले विपक्षी नेता केरल के इन शिक्षकों की चुप्पी पर क्यों मौन साधे हुए हैं? अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को पूरा करने का लिखित और स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलता, तब तक यह आंदोलन किसी भी कीमत पर वापस नहीं लिया जाएगा। फिलहाल, सचिवालय के बाहर का माहौल तनावपूर्ण है और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
𝐑𝐚𝐡𝐮𝐥 𝐆𝐚𝐧𝐝𝐡𝐢 𝐫𝐮𝐬𝐡𝐞𝐬 𝐭𝐨 𝐛𝐚𝐜𝐤 𝐬𝐭𝐮𝐝𝐞𝐧𝐭 𝐩𝐫𝐨𝐭𝐞𝐬𝐭𝐬 𝐢𝐧 𝐃𝐞𝐥𝐡𝐢…
— BJP (@BJP4India) October 26, 2026
But when S. Valarmathi, secretary of the All Kerala Lower Primary School Teacher (LPST) Rank Holders Association, and other rank holders are forced to shave their heads and go on… pic.twitter.com/8D4o6Dlx5q
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