चुनाव आयोग (EC) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष की याचिकाओं के जवाब में आयोग ने दावा किया है कि एसआईआर (SIR) से जुड़े सभी फैसले तीन चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। इस पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सवाल खड़े करते हुए इसे मनमानी करार दिया है।
तीनों मिलकर भी मनमानी करें, तो वो गलत ही है इमरान मसूद ने कहा कि बहस इस बात पर नहीं है कि फैसला किसने लिया, बल्कि इस पर है कि क्या फैसला नियमों के अनुकूल है। उन्होंने दो टूक कहा, अगर तीनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर भी कोई मनमाना फैसला लिया है, तो वह मनमाना ही कहलाएगा। हम किसी आयुक्त को बचाने या लड़ाने की लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं, हमारा मुद्दा नियमों का पालन है।
अहम मुद्दा फॉर्म-6 और वोट कटने का है कांग्रेस सांसद का कहना है कि असली मसला फॉर्म-6 का है, जिसके जरिए लोगों के वोट काटे जा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि विवाद का केंद्र कोई व्यक्ति विशेष नहीं, बल्कि वोट चोरी का डर है। उनके अनुसार, प्रक्रिया में पारदर्शिता न होना ही सबसे बड़ी समस्या है।
आधार को वोटिंग का आधार क्यों नहीं बनाया जा रहा? सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा आधार बायोमेट्रिक की मांग का समर्थन करते हुए मसूद ने सरकार और चुनाव आयोग को घेरा। उन्होंने पूछा कि जब आधार कार्ड पहले से ही बायोमेट्रिक डेटा से लैस है, तो उसे वोटर लिस्ट से लिंक क्यों नहीं किया जा रहा? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव आयोग यह मांग कभी नहीं मानेगा क्योंकि वे ऐसा करना ही नहीं चाहते।
चुनाव आयोग ने हलफनामे में क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने जवाब में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जून 2025 से मई 2026 के बीच एसआईआर के संबंध में लिए गए सभी निर्णय सर्वसम्मति से हुए हैं। आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और अन्य आयुक्तों की सहमति का हवाला देते हुए याचिका में लगाए गए आरोपों को खारिज करने की कोशिश की है।
अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि क्या वह इन रिकॉर्ड्स की जांच करेगा या आयोग के हलफनामे को ही अंतिम सत्य माना जाएगा। प्रश्न यह है कि क्या तकनीकी प्रक्रियाएं लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा कर पा रही हैं या वे महज खानापूर्ति बनकर रह गई हैं?
#WATCH | Delhi: On Election Commission s affidavit, Congress MP Imran Masood says, The Supreme Court should summon all the relevant records; even if all three agreed, the core issue remains Form 6 . If all three made an incorrect decision, then it is still wrong, isn t it? The… https://t.co/WdpgvJt4Te pic.twitter.com/IRXYauAJKH
— ANI (@ANI) October 26, 2026
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