संयुक्त राष्ट्र में भारत की दो टूक: वीटो पावर किसी के राजनीतिक स्वार्थ का औजार नहीं
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में लंबे समय से लंबित सुधारों की मांग को लेकर भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी मुखर आवाज उठाई है। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा है कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों (P5) के पास मौजूद वीटो शक्ति का इस्तेमाल संकीर्ण राजनीतिक हितों को साधने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

वीटो, विशेषाधिकार नहीं जिम्मेदारी है संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवथानेनी हरीश ने स्पष्ट किया कि वीटो का अधिकार एक बड़ी जिम्मेदारी के साथ आता है। वैश्विक शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस शक्ति का प्रयोग अत्यंत संयम के साथ किया जाना चाहिए। भारत का मानना है कि इसे किसी देश के व्यक्तिगत एजेंडे या राजनीतिक स्वार्थ का साधन बनाना वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है।

331 बार वीटो का उपयोग: विश्वसनीयता पर सवाल भारतीय राजदूत ने चिंता जाहिर की कि वीटो के अत्यधिक उपयोग ने सुरक्षा परिषद की विश्वसनीयता को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरे इतिहास में लगभग 200 प्रस्तावों पर 331 बार वीटो का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि जवाबदेही तय करने के लिए बनाए गए मौजूदा तंत्र भी इसके बेजा इस्तेमाल को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं।

केवल तीन देशों पर केंद्रित वीटो की राजनीति रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पांच स्थायी सदस्यों में से दो ऐसे भी हैं जिन्होंने पिछले साढ़े तीन दशकों से वीटो का इस्तेमाल नहीं किया है। भारतीय राजदूत ने संकेत दिया कि अधिकांश वीटो या वीटो की धमकियां केवल तीन देशों की ओर से ही आती हैं। 2022 में बनी वीटो पहल का उद्देश्य जवाबदेही तय करना था, लेकिन हाल के आंकड़े बताते हैं कि स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया है।

अदृश्य वीटो का भी पर्दाफाश भारत ने केवल खुले तौर पर होने वाले वीटो पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि अदृश्य वीटो (Hidden Veto) पर भी निशाना साधा है। राजदूत ने बताया कि परिषद में सहमति का एक अलिखित नियम बना हुआ है, जिसका फायदा उठाकर निर्वाचित और गैर-निर्वाचित सदस्य भी किसी प्रस्ताव को बिना कारण बताए रोक देते हैं। भारत ने तर्क दिया है कि यह गुप्त अवरोधक तंत्र भी सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली को पंगु बना रहा है।

80 साल पुराना ढांचा अब अप्रासंगिक भारत के साथ G4 देशों ने भी संयुक्त बयान जारी कर मांग की है कि 80 साल पुराने संयुक्त राष्ट्र के ढांचे में अब व्यापक बदलाव की जरूरत है। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए अपनी दावेदारी पेश करता रहा है, लेकिन वीटो के मौजूदा स्वरूप और सुरक्षा परिषद के पुराने ढांचे को वैश्विक वास्तविकता के अनुरूप न मानकर, भारत ने इसे आधुनिक बनाने पर सबसे अधिक जोर दिया है।

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