समालखा में गूंजा विश्वबंधुत्व का संदेश: 79वें निरंकारी संत समागम का भव्य समापन
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समालखा के निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर आयोजित चार दिवसीय 79वां वार्षिक निरंकारी संत समागम आज भक्ति, आस्था और विश्वबंधुत्व के संदेश के साथ संपन्न हो गया। इस आध्यात्मिक महाकुंभ में देश और विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और सतगुरु के प्रवचनों से आत्मिक शांति प्राप्त की।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लिया आशीर्वाद

समागम के अंतिम दिन हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शिरकत की। उन्होंने सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज और निरंकारी राजपिता रमित जी महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने उन्हें शॉल भेंट कर नमन किया।

सत्संग के बाद अपने विचार साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समागम में आना उनके लिए परम सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि निरंकारी संत समागम मानवता को आपसी भेदभाव छोड़कर प्रेम, करुणा और निस्वार्थ सेवा का मार्ग दिखाता है, जो वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

महाराष्ट्र के 20 हजार सेवादारों का अद्भुत समर्पण

इस समागम की भव्यता के पीछे महाराष्ट्र से आए 20,000 सेवादारों का अहम योगदान रहा। इन सेवादारों ने महीनों पहले से समागम स्थल पर पहुंचकर निस्वार्थ भाव से श्रमदान किया। उन्हीं के अथक प्रयासों से विशाल पंडालों का निर्माण और आधुनिक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित हो सकी। उनकी यह सेवा भावना उपस्थित लाखों भक्तों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी रही।

दिग्गजों की रही उपस्थिति

इस दिव्य अवसर पर हरियाणा विधानसभा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण, पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार, विधायक प्रमोद विज, मनमोहन भड़ाना, निखिल मदान और देवेंद्र कादियान समेत कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। सभी नेताओं ने सतगुरु के चरणों में नतमस्तक होकर समाज में मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने की प्रेरणा ली।

सतगुरु माता सुदीक्षा जी का जागृति संदेश

सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने अंतिम प्रवचनों में जागृति का अर्थ स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मज्ञान प्राप्त करना आध्यात्मिक यात्रा का अंत नहीं, बल्कि शुरुआत है। सच्ची जागृति तब है जब मनुष्य अपने हर कर्म और व्यवहार में निरंतर परमात्मा की अनुभूति करे।

माता जी ने जोर दिया कि सत्संग से मिली सीख को केवल सुनना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे अपने जीवन के आचरण में उतारना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सेवा और समर्पण दिखावे के लिए नहीं, बल्कि हृदय की गहराई से होना चाहिए।

सांस्कृतिक और सेवा का संगम

समागम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, लघु नाटिकाओं और सेवादल की गतिविधियों के जरिए अनुशासन और सद्भाव का संदेश दिया गया। संत निरंकारी सेवादल के मुख्य संचालक एस. के. जुनेजा ने सभी स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया। समागम का यह आयोजन निस्वार्थ सेवा और सामाजिक समरसता की एक ऐसी मिसाल बन गया, जिसे श्रद्धालु लंबे समय तक याद रखेंगे।

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