500 करोड़ का खेला ? संजय राउत ने अमित शाह को लिखी चिट्ठी, ED जांच की मांग
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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल द्वारा लगाए गए 500 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन के आरोपों पर अब शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने मोर्चा खोल दिया है। राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस पूरे मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच की मांग की है।

क्या है 500 करोड़ का विवाद? मनोज जरांगे पाटिल ने हाल ही में चौंकाने वाला दावा किया था कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राज्य में भाजपा की कोर टीम के वरिष्ठ नेताओं से 500 करोड़ रुपये लिए थे। आरोप है कि यह रकम एकनाथ शिंदे के बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे के जरिए जरांगे तक पहुंचाई जानी थी, ताकि मराठा आंदोलन को चुप कराया जा सके। हालांकि, जरांगे का दावा है कि यह पैसा उन तक कभी नहीं पहुँचा।

ऑडियो क्लिप से गरमाया मामला संजय राउत ने इस मामले में वायरल हुई एक ऑडियो क्लिप का जिक्र करते हुए इसे बेहद गंभीर बताया है। राउत का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक आरोप नहीं है, बल्कि सबूतों के साथ सामने आया मनी लॉन्ड्रिंग का केस है। उन्होंने सवाल उठाया है कि अगर यह पैसा जरांगे तक नहीं पहुँचा, तो आखिर यह 500 करोड़ रुपये की बड़ी रकम गायब कहाँ हो गई?

अनिल देशमुख केस का दिया हवाला अपने पत्र में संजय राउत ने पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के मामले की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि 100 करोड़ के वसूली कांड में बिना ठोस सबूतों के भी ED ने तत्परता दिखाई थी। राउत ने तंज कसते हुए कहा, जब अनिल देशमुख मामले में ED इतनी सक्रिय थी, तो 500 करोड़ के इस पुख्ता सबूत वाले मामले में खामोशी क्यों है?

PMLA के तहत कार्रवाई की मांग राउत ने अमित शाह से आग्रह किया है कि वे महाराष्ट्र पुलिस और ED को मामले की जांच के आदेश दें। उन्होंने कहा कि इस घोटाले में भाजपा की कोर टीम, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके बेटे डॉ. श्रीकांत शिंदे शामिल हैं। सांसद ने मांग की है कि जांच के जरिए यह पता लगाया जाए कि पैसा कहाँ से आया, किसे दिया गया और अंत में कहाँ गया।

भाजपा पर तीखा हमला संजय राउत ने आरोप लगाया है कि भाजपा अब केवल विधायक या सांसद ही नहीं खरीद रही, बल्कि आंदोलनों को भी खरीदने का काम कर रही है। पत्र में उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह मनी लॉन्ड्रिंग का स्पष्ट मामला है और दोषियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए। अब देखना यह है कि गृह मंत्रालय इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

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