पुणे स्थित प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER) इन दिनों एक विवाद के केंद्र में है। संस्थान की श्रीनिवास रामानुजन लाइब्रेरी में दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद की किताब रखे जाने पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। बढ़ते विवाद और संस्थान की छवि पर उठते सवालों के बीच प्रशासन को यह किताब लाइब्रेरी से हटानी पड़ी।
कौन सी किताब बनी विवाद की जड़? विवाद के केंद्र में उमर खालिद की किताब फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज: आदिवासी हिस्ट्रीज एंड द पॉलिटिक्स ऑफ पावर है। यह किताब असल में उनकी वही Ph.D शोध (थीसिस) है, जिसे उन्होंने 2018 में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में जमा किया था। 2019 में इसी शोध के आधार पर उन्हें जेएनयू से डॉक्टरेट की डिग्री मिली थी। इसमें झारखंड के आदिवासी समुदायों के इतिहास को लेकर अध्ययन किया गया है।
सोशल मीडिया पर उठा विरोध का स्वर केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित इस साइंस रिसर्च इंस्टीट्यूट में एक विवादित छवि वाले व्यक्ति की किताब की मौजूदगी ने लोगों को हैरान कर दिया। जैसे ही सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और जानकारी वायरल हुई, नेटिजन्स ने सवाल खड़े किए कि एक वैज्ञानिक संस्थान में ऐसी सामग्री को क्यों जगह दी गई। विरोध इतना बढ़ गया कि प्रशासन को तुरंत प्रभाव से कदम उठाते हुए किताब को लाइब्रेरी से हटाना पड़ा।
JNU कैंपस में भी गरमाया माहौल यह घटना ऐसे समय में हुई है जब दिल्ली के JNU कैंपस में भी तनाव की खबरें हैं। हाल ही में कैंपस की दीवारों पर उमर खालिद को रिहा करो और नक्सलबाड़ी जिंदाबाद जैसे नारे लिखे गए थे। छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इसके लिए वामपंथी छात्र संगठनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दावा यह भी किया गया है कि सावरकर के चित्र के साथ भी छेड़छाड़ की गई है।
कौन है उमर खालिद? उमर खालिद जेएनयू के पूर्व छात्र और छात्र नेता रह चुके हैं। फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों की साजिश रचने और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। वह वर्तमान में तिहाड़ जेल में बंद हैं और उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत केस चल रहा है।
फिलहाल IISER पुणे प्रशासन ने विवाद से किनारा करते हुए किताब को वापस ले लिया है, लेकिन सरकारी संस्थानों में इस तरह की किताबों की उपलब्धता को लेकर बहस और तेज हो गई है।
*Umar Khalid’s thesis is added as a book at IISER, Pune.
— Sambit Parida | ସମ୍ୱିତ୍ ପରିଡା଼ (@sambitkparida) October 24, 2026
This is a central government institution for science research.
Is he the same Umar Khalid ?#UmarKhalidpic.twitter.com/pqhWOBZw2D
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