रीवा परमाणु परियोजना: ग्रामसभा की अनदेखी कर NOC जारी करने का आरोप, उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा
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रीवा: मध्य प्रदेश में रीवा के रोझौही-सरई कला क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा पावर की परमाणु परियोजना विवादों के घेरे में आ गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस पूरी प्रक्रिया को कागजी फर्जीवाड़ा करार दिया है।

ग्रामसभा का इनकार, फिर भी NOC कैसे?

उमंग सिंघार के अनुसार, 3 सितंबर 2026 को ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से ड्रिलिंग के लिए सहमति देने से इनकार कर दिया था। पंचायत ने इसकी सूचना 5 सितंबर को कलेक्टर को भी दी थी। इसके बावजूद, 23 सितंबर को जारी हुई NOC में 4 सितंबर के एक फर्जी सहमति पत्र का उल्लेख किया गया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब ग्रामसभा ने अनुमति ही नहीं दी, तो प्रशासन ने किस आधार पर NOC जारी की?

जांच और निरस्तीकरण की मांग

सरपंच कोमल संजय सिंह ने 8 अक्टूबर को संभागायुक्त और कलेक्टर से शिकायत कर इस कथित सहमति पत्र की जांच और NOC को निरस्त करने की मांग की थी। नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से इस शिकायत पर हुई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका आरोप है कि सरकार ग्रामीणों की आवाज सुनने के बजाय उन्हें उजाड़ने पर आमादा है।

1500 परिवारों के विस्थापन का डर

इस परियोजना का क्षेत्र 1,500 से अधिक परिवारों के घर और जीविका का साधन है। यहाँ बड़ी संख्या में आदिवासी, अनुसूचित जाति के परिवार और छोटे किसान रहते हैं। आंदोलन के दौरान एक बुजुर्ग महिला विमला कोल की मृत्यु का उल्लेख करते हुए सिंघार ने कहा कि सरकार आदिवासी और दलितों की जमीनों को हथियाना चाहती है।

सुरक्षा मानकों पर उठाए सुरक्षा सवाल

सिंघार ने सरकार से रिएक्टरों की स्थापना, सुरक्षा दायरे में आने वाले गांवों और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) पर स्पष्ट जवाब मांगा है। उन्होंने चेरनोबिल और फुकुशिमा जैसी परमाणु आपदाओं का हवाला देते हुए पूछा कि क्या सरकार के पास कोई आपदा प्रबंधन योजना है? उन्होंने तंज कसते हुए कहा, जिस राज्य में लोग दूषित पानी और जहरीली कफ सिरप से जान गंवा रहे हैं, वहां की सरकार परमाणु संयंत्र की सुरक्षा की गारंटी कैसे देगी?

पन्ना केन-बेतवा परियोजना पर भी मुखर

परमाणु विवाद के अलावा, सिंघार ने पन्ना में केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित परिवारों का भी समर्थन किया है। उन्होंने पन्ना में 27 दिनों से अनशन पर बैठे अमित भटनागर का अनशन तुड़वाकर उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा पिछले सत्र में दिए गए जांच के वादों पर सिंघार ने सवाल उठाए और कहा कि प्रभावित परिवारों को अब तक न्याय नहीं मिला है।

नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी है कि सरकार अगर ग्रामसभा के निर्णयों और सुरक्षा संबंधी अध्ययनों को सार्वजनिक नहीं करती, तो यह आंदोलन और उग्र होगा। फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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