सर्बिया में बदलाव की आंधी: छात्रों ने खत्म की वुचिच की 14 साल की सत्ता
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सर्बिया की राजनीति में एक ऐतिहासिक उलटफेर हुआ है। पिछले 14 वर्षों से देश की सत्ता पर काबिज राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच और उनकी पार्टी सर्बियाई प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) को संसदीय चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस जीत के साथ ही छात्र समर्थित स्टूडेंट्स लिस्ट गठबंधन ने सत्ता की बागडोर अपने हाथों में ले ली है।

हार स्वीकारने पर मजबूर हुए वुचिच मतदान खत्म होने के कुछ ही घंटों बाद अलेक्जेंडर वुचिच ने अपनी हार मान ली। उन्होंने हार का ठीकरा स्वतंत्र मीडिया और यूरोपीय देशों के हस्तक्षेप पर फोड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, वुचिच की पार्टी को जहां 17 लाख वोट मिले, वहीं छात्र समर्थित गठबंधन को 22 लाख मतदाताओं का समर्थन प्राप्त हुआ। मतदान का प्रतिशत करीब 70 फीसदी रहा।

सड़कों पर जश्न में डूबा बेलग्रेड चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद राजधानी बेलग्रेड समेत पूरे सर्बिया में जश्न का माहौल है। सड़कों पर हजारों लोग उतर आए हैं, जो वुचिच की हार का जश्न मना रहे हैं। कई स्थानों पर तनाव भी देखा गया; प्रदर्शनकारियों ने पूर्व सत्ता के प्रतीकों को हटाया और पुलिस के साथ झड़प की खबरें भी आईं। सुरक्षा के मद्देनजर चुनाव आयोग और अहम सरकारी भवनों के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्रों का संघर्ष यह जीत अचानक नहीं मिली है। पिछले दो वर्षों से सर्बियाई छात्र भ्रष्टाचार, सरकारी अनियमितताओं और लोकतंत्र के कमजोर होने के खिलाफ सड़कों पर थे। आंदोलन को और अधिक गति तब मिली जब 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन की छत गिरने से 16 लोगों की मौत हुई। छात्रों ने इसे सरकारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का परिणाम बताया, जिसने आम जनता के गुस्से को चुनावी शक्ति में बदल दिया।

विशेषज्ञों और पेशेवरों का गठबंधन स्टूडेंट्स लिस्ट गठबंधन की खासियत यह रही कि इसमें छात्र स्वयं उम्मीदवार नहीं थे। इसके बजाय, इसमें विशेषज्ञों, किसानों, खिलाड़ियों और कलाकारों को शामिल किया गया। गठबंधन ने जनता से भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन, लोकतांत्रिक संस्थाओं की बहाली और सरकारी जवाबदेही का वादा किया है।

यूरोप की नजर और भविष्य की राह यूरोपीय संघ ने इस जनादेश का स्वागत किया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि सर्बिया की जनता ने अपने भविष्य का स्पष्ट फैसला सुनाया है। अब नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन चुनावी वादों को पूरा करने की है, जिनके दम पर उन्होंने यह ऐतिहासिक जीत हासिल की है। सर्बिया का यह बदलाव पूरे यूरोप के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।

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