यूपी की सियासत में ओवैसी का ऐलान: योगी को तीसरी बार सीएम बनने से रोकना ही मिशन
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उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बड़ा दांव खेलते हुए राज्य की राजनीति का पारा बढ़ा दिया है।

कैराना, शामली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ओवैसी ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी पार्टी का मुख्य लक्ष्य बीजेपी को सत्ता से बाहर करना है।

योगी को सत्ता से बेदखल करने की तैयारी ओवैसी ने बेबाक अंदाज में कहा कि वे किसी भी सूरत में योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनते हुए नहीं देखना चाहते। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ओवैसी ने विपक्षी दलों के साथ गठबंधन करने के संकेत भी दिए हैं।

उन्होंने कहा, जो भी योगी सरकार को सत्ता से हटाना चाहता है, हमारी पार्टी उसके साथ जाने को तैयार है। हम पूरी कोशिश करेंगे कि यूपी में बीजेपी की सरकार न बने।

विपक्ष पर ओवैसी का तीखा हमला बीजेपी की लगातार चुनावी जीत और खुद पर लगने वाले आरोपों पर ओवैसी ने विपक्षी दलों को घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि 2014 से 2024 के बीच हुए चुनावों में बीजेपी की जीत का कारण क्या विपक्षी दलों की नाकामी नहीं है?

ओवैसी ने कहा कि जब सपा, कांग्रेस और बसपा बड़ी संख्या में उम्मीदवार उतारते हैं, तो उन पर सवाल नहीं उठाए जाते, लेकिन AIMIM को हमेशा वोट कटवा या बीजेपी की मदद करने वाला बताकर निशाना बनाया जाता है।

जब तक अब्दुल नेता नहीं बनेगा, समस्याओं का हल नहीं अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए ओवैसी ने कहा कि अल्पसंख्यक समाज के मुद्दों को केवल चुनाव तक सीमित रखना बंद होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा जैसे दल अल्पसंख्यकों का वोट तो चाहते हैं, लेकिन उनके रोजगार, शिक्षा, जमीन के विवाद और मस्जिदों के विध्वंस जैसे गंभीर मुद्दों पर चुप्पी साधे रखते हैं।

ओवैसी ने जोर देकर कहा, जब तक अब्दुल खुद अपना नेता नहीं बनेगा, तब तक समुदाय की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। हमें अपनी सियासी लीडरशिप और पॉलिटिकल एजेंसी की जरूरत है, जो सदन के अंदर और बाहर मजबूती से अपनी बात रख सके।

सियासी गठबंधन की राह कितनी आसान? ओवैसी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में विपक्षी गठबंधन (INDIA) अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे रहा है। ऐसे में ओवैसी का यह गठबंधन का प्रस्ताव स्वीकार किया जाएगा या फिर इसे एक और सियासी पैंतरा माना जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

फिलहाल, ओवैसी के इस रुख ने यूपी की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा को हवा दे दी है।

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