चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस का मशाल वार: 1 नवंबर की दिल्ली रैली से पहले बढ़ा सियासी पारा
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लखनऊ/नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन हर दिन तेज हो रहा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में युवा कांग्रेस ने मशाल जुलूस निकालकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह विरोध प्रदर्शन पार्टी के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसे कांग्रेस वोट बचाओ, देश बचाओ का नाम दे रही है।

क्या है कांग्रेस का मुख्य आरोप? कांग्रेस का सीधा आरोप है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर पात्र मतदाताओं के नाम जानबूझकर काटे जा रहे हैं। पार्टी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। कांग्रेस का तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव लोकतंत्र के लिए खतरा है।

1 नवंबर को दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल रैली का आयोजन किया है। राहुल गांधी के नेतृत्व में होने वाली इस रैली में 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें छात्र, किसान, मजदूर और युवाओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है, ताकि वोट चोरी और मतदाता सूची की अनियमितताओं को राष्ट्रीय मुद्दा बनाया जा सके।

30 अक्टूबर को पब्लिक इम्पीचमेंट की तैयारी रैली से ठीक एक दिन पहले, 30 अक्टूबर को विपक्ष एक प्रतीकात्मक पब्लिक इम्पीचमेंट (सार्वजनिक महाभियोग) आयोजित करने जा रहा है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के अनुसार, इसे एक मॉक पार्लियामेंट के रूप में पेश किया जाएगा, जहाँ चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष अपनी आवाज बुलंद करेगा। हालांकि, यह पूरी तरह से एक राजनीतिक और प्रतीकात्मक गतिविधि है।

पंजाब में भी हलचल तेज इस विरोध के साथ-साथ कांग्रेस देशभर में अपनी संगठनात्मक पकड़ मजबूत कर रही है। पंजाब कांग्रेस ने भी आगामी रैली के लिए कमर कस ली है। राज्य में संगठनात्मक बैठकें की जा रही हैं, ताकि दिल्ली के प्रदर्शन को सफल बनाया जा सके। हालांकि, दल-बदल की खबरों और आंतरिक राजनीतिक बयानबाजी ने पंजाब के सियासी माहौल को भी गरमा दिया है।

निष्कर्ष कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक चुनाव आयोग मतदाता सूची और चुनावी पारदर्शिता पर उनके सवालों का जवाब नहीं देता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। 1 नवंबर की रैली को महज एक विरोध सभा नहीं, बल्कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।

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