सर्बिया में छात्रों का इंकलाब : 12 साल पुरानी सत्ता ढही, राष्ट्रपति ने नतीजों से पहले मानी हार
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ऐतिहासिक मतदान ने बदली तस्वीर सर्बिया में हुए आम चुनावों ने देश की राजनीतिक दिशा पूरी तरह बदल दी है। छात्र आंदोलन की लहर के बीच हुई बंपर वोटिंग ने 1992 का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। चुनाव निगरानी संस्थाओं CeSID और इप्सोस के अनुसार, मतदान का आंकड़ा 67.6% तक पहुंच गया, जो यूगोस्लाविया के विघटन के बाद सबसे अधिक है।

राष्ट्रपति ने खुद किया हार का ऐलान अधिकारिक नतीजे घोषित होने से पहले ही राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वुसिक ने अपनी हार स्वीकार कर ली है। वुसिक ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 250 सीटों वाली संसद में स्टूडेंट लिस्ट को 135 से 140 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि उनकी पार्टी को मात्र 105 सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा, नतीजे आना बाकी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि हम हार चुके हैं।

विपक्ष में बैठने को तैयार वुसिक अपनी विदाई को स्वीकार करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि अब वह एक सशक्त विपक्षी नेता की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। एक दशक से अधिक समय से सत्ता पर काबिज रहे वुसिक के लिए यह बड़ा झटका है। भ्रष्टाचार के आरोपों और लंबे समय से चल रहे जन-आक्रोश ने उनके पतन की पटकथा लिख दी थी।

सड़कों पर जश्न में डूबे छात्र वुसिक की घोषणा के बाद स्टूडेंट लिस्ट के मुख्यालय में जश्न का माहौल है। छात्रों का कहना है कि यह केवल एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि आजादी और न्याय की जीत है। स्टूडेंट विंग के उम्मीदवार राडोमिर साइसिक ने कहा कि लगभग सभी पोलिंग स्टेशनों पर उनके उम्मीदवार बड़ी बढ़त बनाए हुए हैं।

नए चेहरों पर जनता का भरोसा पिछले दो वर्षों से छात्रों के नेतृत्व में हो रहे आंदोलन में यूनिवर्सिटी प्रोफेसर, कलाकार और किसान भी शामिल हो गए थे। जनता ने पुराने चेहरों को नकारते हुए नए नेतृत्व को चुना है। यह चुनाव इस बात का प्रमाण है कि सर्बिया की जनता बदलाव और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के लिए पूरी तरह तैयार थी।

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