8 साल पुराना मानहानि केस: अमित शाह पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को बड़ी राहत, कोर्ट ने किया बरी
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लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सुल्तानपुर की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सोमवार को अदालत ने अमित शाह के खिलाफ की गई टिप्पणी से जुड़े 8 साल पुराने मानहानि मामले में राहुल गांधी को बरी कर दिया है।

क्या था पूरा मामला? यह विवाद साल 2018 का है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए थे। राहुल ने अमित शाह का नाम एक हत्या के मामले से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए थे।

बीजेपी नेता ने दर्ज कराया था केस राहुल गांधी के इस बयान से आहत होकर सुल्तानपुर के तत्कालीन बीजेपी जिला उपाध्यक्ष और सहकारी बैंक के अध्यक्ष विजय मिश्रा ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने अमित शाह की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए जानबूझकर भ्रामक टिप्पणी की।

क्या था राहुल का विवादित बयान? राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा था कि जो पार्टी ईमानदारी और सच्चाई की बात करती है, उसका राष्ट्रीय अध्यक्ष एक हत्या के मामले में आरोपी कैसे हो सकता है? इसके अलावा उन्होंने जज बी.एच. लोया की मौत का जिक्र करते हुए भी सवाल उठाए थे।

कानूनी दांव-पेच और अदालत की प्रक्रिया शिकायतकर्ता विजय मिश्रा के वकील संतोष कुमार पांडे ने तर्क दिया था कि मामले में प्रथम दृष्टया दोष सिद्ध होता है, जिसके बाद कोर्ट ने आईपीसी की धारा 500 के तहत राहुल गांधी को समन जारी किया था। सुनवाई के दौरान राहुल गांधी तीन बार अदालत के सामने पेश हुए।

कोर्ट ने इसी साल 20 फरवरी को राहुल गांधी को जमानत दी थी, जिसके बाद 26 जुलाई को उनका बयान दर्ज किया गया था। इस मामले में दोषी पाए जाने पर अधिकतम दो साल की सजा का प्रावधान था, लेकिन अदालत ने सबूतों के आधार पर कांग्रेस नेता को आरोपों से मुक्त कर दिया।

अमित शाह का संदर्भ राहुल गांधी का यह बयान 2005 के सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी मुठभेड़ मामले को लेकर था। हालांकि, साल 2014 में मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने अमित शाह को इस मामले में पहले ही बरी कर दिया था। इसी पृष्ठभूमि को आधार बनाकर मानहानि का मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसका पटाक्षेप आज कोर्ट के फैसले के साथ हो गया है।

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