ब्राजील की राजनीति में एक बार फिर लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा का बोलबाला है। 80 साल की उम्र में लूला ने चौथी बार देश के राष्ट्रपति पद पर जीत दर्ज करके इतिहास रच दिया है। यह जीत न केवल व्यक्तिगत है, बल्कि ब्राजील के बदलते राजनीतिक मिजाज को भी दर्शाती है।
पहले दौर की हार को जीत में बदला चुनाव का पहला दौर लूला के लिए चुनौतीपूर्ण रहा था, जिसमें फ्लावियो बोल्सोनारो 47.03 प्रतिशत वोट के साथ आगे थे, जबकि लूला को 45.16 प्रतिशत वोट ही मिल पाए थे। हालांकि, लूला ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और युवा मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित किया। रैलियों और सोशल मीडिया के आक्रामक प्रचार का असर दिखा और दूसरे दौर में लूला ने 51.75 प्रतिशत वोट हासिल कर बोल्सोनारो (48.25%) को पछाड़ दिया।
सत्ता का लंबा सफर लुला के लिए यह मुकाम आसान नहीं रहा। 1989 में पहली बार चुनावी मैदान में उतरने के बाद उन्हें पहली जीत 2002 में मिली थी। इसके बाद 2006 में वह दूसरी बार जीते। 2010 और 2014 में उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन उनकी पार्टी सत्ता में रही। 2022 में वापसी के बाद अब 2026 की जीत ने उन्हें चौथी बार राष्ट्रपति की कुर्सी तक पहुंचाया है।
जेल से राष्ट्रपति भवन तक का संघर्ष लुला का जीवन किसी फिल्म की कहानी जैसा है। उनके राजनीतिक करियर में एक समय ऐसा भी आया था जब उन्हें करीब 580 दिन जेल में बिताने पड़े थे। हालांकि, कानूनी दांव-पेचों के बाद वह दोषमुक्त हुए और पूरी ताकत के साथ राजनीति में लौटे। गरीबी उन्मूलन और मजदूरों के अधिकार हमेशा से उनके मुख्य चुनावी मुद्दे रहे हैं।
लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प अपनी जीत पर लूला ने कहा, हमने लोगों को यह समझाया कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए मतदान जरूरी है। अब हम देश चलाने की अपनी प्रक्रिया में बदलाव लाएंगे और जनता की भागीदारी बढ़ाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्राजील किसी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा और देश की संप्रभुता सर्वोपरि है।
5 जनवरी से शुरू होगा नया कार्यकाल लुला दा सिल्वा औपचारिक रूप से 5 जनवरी 2027 को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। उनकी जीत ने ब्राजील के राजनीतिक परिदृश्य में एक बार फिर स्थिरता की बहस छेड़ दी है। विपक्षी खेमे के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जबकि लूला के समर्थकों में इस ऐतिहासिक वापसी को लेकर भारी उत्साह है।
After winning Brazil s Presidential Election, Luiz Inácio Lula da Silva says, We managed to convince people that voting was extremely important to safeguard democracy in Brazil. We defeated foreign intervention through digital platforms. Brazil is no one s backyard. We will… pic.twitter.com/OFxe12xjSQ
— ANI (@ANI) October 26, 2026
भारत बनाम न्यूजीलैंड: क्या वेलिंगटन में बारिश बिगाड़ सकती है खेल? जानिए मैच का पूरा हाल
रुपया मैं उठाऊंगा : मोदी के हमशक्ल और कुणाल कामरा की भिड़ंत, समय रैना बोले- साइबर सेल आ जाएगी
सरकार को घेरने चले थे सौरभ भारद्वाज, स्पेलिंग मिस्टेक ने कर दिया खेला
खड़गे वर्तमान के दुर्योधन हैं, कांग्रेस का सर्वनाश निश्चित : BJP सांसद का तीखा प्रहार
2 साल की बच्ची का तबले पर जादुई कमाल, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम
महाराष्ट्र-राजस्थान का सफर अब और आसान: रेलवे ने बढ़ाई स्पेशल ट्रेनों की सुविधा
प्रभास की फौजी विवादों में: सुभाष चंद्र बोस के परपोते ने उठाए गंभीर सवाल
देश में दो मियां, दोनों को घुसपैठियों से प्यार; योगी का अखिलेश-राहुल पर तीखा हमला
यूपी कांग्रेस में सीट बंटवारे पर रार! सपा के साथ समझौते पर बंटे नेता, क्या 150 सीटों की जिद बिगाड़ेगी खेल?
अहान पांडे और शरवरी वाघ की बेपरवाह का ऐलान, पहली बार साथ दिखेंगे ये सितारे