सर्बिया में जेन-जी का इंकलाब: 14 साल पुरानी सत्ता का हुआ अंत, राष्ट्रपति वुसिक ने मानी हार
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बेलग्रेड: सर्बिया की राजनीति में एक ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिला है। दो साल तक सड़कों पर संघर्ष करने वाले छात्रों ने चुनावी जंग में बड़ी जीत हासिल की है, जिसके चलते पिछले 14 सालों से सत्ता पर काबिज राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक को हार स्वीकार करनी पड़ी है।

छात्रों का जादुई आंकड़ा 250 सीटों वाली सर्बियाई संसद में शुरुआती रुझान और अनुमान स्पष्ट संकेत दे रहे हैं। छात्र समर्थित समूह स्टूडेंट लिस्ट को लगभग 138 सीटें मिलती दिख रही हैं, जो स्पष्ट बहुमत है। वहीं, वुसिक की सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) 104 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है।

वुडसिक ने की हार की पुष्टि खुद राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने पार्टी मुख्यालय में अपनी हार स्वीकार कर ली है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा, स्ट्रैटिफाइड सैंपल के आधार पर यह स्पष्ट है कि हम चुनाव हार गए हैं और स्टूडेंट लिस्ट विजयी हुई है। यह बयान दशकों से चले आ रहे उनके दबदबे के अंत का आधिकारिक संकेत है।

सड़कों से सत्ता के गलियारे तक यह जीत अचानक नहीं मिली है। पिछले दो सालों से सर्बिया के छात्रों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर मोर्चा खोल रखा था। बेलग्रेड विश्वविद्यालय से शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया। छात्रों के इस शांतिपूर्ण लेकिन आक्रामक विरोध ने आम जनता के गुस्से को चुनावी शक्ति में बदल दिया।

बेलग्रेड में जश्न का माहौल परिणामों की घोषणा होते ही राजधानी बेलग्रेड की सड़कें समर्थकों से भर गईं। छात्र आंदोलन के मुख्यालय पर जीत के नारे गूंज उठे। प्रोफेसर रादोमिर साइचिक ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि, आज जनता की आवाज की जीत हुई है। जश्न के साथ-साथ अब देश के भविष्य को संवारने की बड़ी जिम्मेदारी हमारे कंधों पर है।

सियासत में बड़ा बदलाव यह चुनाव केवल अंकगणित का खेल नहीं, बल्कि सर्बिया की युवा पीढ़ी की महत्वाकांक्षाओं की जीत माना जा रहा है। एक दशक से अधिक समय से सत्ता में रहे वुसिक के युग का अंत होना, बाल्कन क्षेत्र की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत है। अब दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि छात्र नेतृत्व वाला यह नया शासन देश को किस दिशा में ले जाता है।

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