तेज गेंदबाज बनना चाहते थे ऋद्धिमान साहा, मगर अपनी कलाकारी से बन गए दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर
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भारतीय क्रिकेट में जब भी बेहतरीन विकेटकीपिंग की बात होती है, तो ऋद्धिमान साहा का नाम सम्मान से लिया जाता है। विकेट के पीछे उनकी बिजली जैसी फुर्ती और सटीक तकनीक ने उन्हें दुनिया के चुनिंदा विकेटकीपरों की कतार में खड़ा किया। लेकिन क्या आप जानते हैं, साहा कभी विकेटकीपर बनना ही नहीं चाहते थे?

बचपन का सपना: तेज गेंदबाज और रेसिंग ड्राइवर आज अपना 42वां जन्मदिन मना रहे ऋद्धिमान साहा के शुरुआती सपने क्रिकेट से थोड़े अलग थे। बचपन में वे न केवल एक तेज गेंदबाज बनना चाहते थे, बल्कि एक फॉर्मूला-1 ड्राइवर बनने का भी सपना देखा करते थे। सिलीगुड़ी की गलियों में टेनिस बॉल से तेज गेंदबाजी करने वाले साहा की किस्मत उन्हें लेदर बॉल के साथ विकेट के पीछे ले आई। यह बदलाव उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

धोनी के दौर में लंबा इंतजार साहा ने 2007 में बंगाल के लिए अपने प्रथम श्रेणी करियर की शुरुआत की। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें अपनी जगह बनाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। उस समय भारतीय टीम में महेंद्र सिंह धोनी का दबदबा था। 2010 में नागपुर टेस्ट के जरिए उन्हें डेब्यू का मौका मिला, लेकिन नियमित विकेटकीपर के रूप में उनकी असली पहचान 2014 में धोनी के संन्यास के बाद बनी।

टेस्ट क्रिकेट के वॉल मैन ऋद्धिमान साहा की विकेटकीपिंग तकनीक के कायल पूर्व कप्तान विराट कोहली भी रहे हैं। साहा ने अपने 40 टेस्ट मैचों के करियर में न केवल 92 कैच लपके और 12 स्टंपिंग कीं, बल्कि बल्ले से भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 3 शतक और 6 अर्धशतकों की मदद से 1,353 रन बनाए। उनकी तकनीक और गेंद को पकड़ने की अद्भुत क्षमता ने उन्हें टेस्ट फॉर्मेट का विश्वसनीय खिलाड़ी बनाया।

घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में जलवा साहा का प्रभाव केवल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा। 2007 से 2025 के बीच प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने 7,169 रन बनाए और 346 कैच लिए। आईपीएल में भी उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की। कोलकाता, चेन्नई, पंजाब, हैदराबाद और गुजरात टाइटंस जैसी टीमों के लिए खेलते हुए उन्होंने 170 मैचों में 2,934 रन बनाए, जिसमें एक यादगार शतक भी शामिल है।

कोचिंग की नई पारी फरवरी 2025 में क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद साहा अब अपने अनुभव का इस्तेमाल नई पीढ़ी को सिखाने में कर रहे हैं। फिलहाल वे बंगाल की अंडर-23 पुरुष क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के रूप में अपनी दूसरी पारी खेल रहे हैं। एक तेज गेंदबाज बनने की हसरत से शुरू हुआ उनका सफर आज एक बेहतरीन मेंटॉर के रूप में जारी है, जो भारतीय क्रिकेट में उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहा है।

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