मार्को रुबियो का जामनगर मिशन : वेनेजुएला तेल और रूस-भारत संबंधों का नया समीकरण
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की दो दिवसीय भारत यात्रा ने कूटनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। आमतौर पर दिल्ली केंद्रित रहने वाले विदेशी दौरों से हटकर, रुबियो ने मुंबई और जामनगर को प्राथमिकता दी। यह दौरा भारत और अमेरिका के बीच किसी बड़े व्यापारिक समझौते की आहट और बदलती वैश्विक ऊर्जा राजनीति का स्पष्ट संकेत है।

मुंबई और जामनगर ही क्यों चुना? रुबियो का यह दौरा पूरी तरह से बिजनेस और एनर्जी डिप्लोमेसी पर केंद्रित था। दिल्ली के औपचारिक गलियारों के बजाय, उन्होंने भारत के औद्योगिक केंद्रों का रुख किया। मुंबई में उन्होंने एस. जयशंकर के साथ व्यापार और रक्षा जैसे मुद्दों पर बात की, तो वहीं टाटा और अदाणी समूह के प्रमुखों से मुलाकात कर निवेश की संभावनाओं को तलाशा।

रिलायंस और वेनेजुएला का तेल कनेक्शन रुबियो की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा गुजरात के जामनगर में बीता। उन्होंने मुकेश अंबानी के साथ रिलायंस की रिफाइनरी, गीगा फैक्ट्री और डेटा सेंटरों का दौरा किया। इसके पीछे की बड़ी वजह वेनेजुएला का कच्चा तेल है। अमेरिका चाहता है कि भारत वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाए।

पिछले कुछ महीनों में भारत ने वेनेजुएला से तेल आयात में तेजी दिखाई है, जिसका बड़ा हिस्सा रिलायंस की रिफाइनरियों में संसाधित हो रहा है। सितंबर 2026 में भारत के कुल वेनेजुएला तेल आयात का 76% केवल रिलायंस ने ही खरीदा था। अमेरिका अब वेनेजुएला के ऊर्जा क्षेत्र पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए भारत को एक बड़े खरीददार के रूप में देख रहा है।

रूस और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत रूस से भी भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। रुबियो की जामनगर यात्रा और वेनेजुएला पर जोर देना इस बात का संकेत है कि अमेरिका अपनी ऊर्जा कूटनीति के जरिए भारत को रूस पर निर्भरता कम करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। अमेरिका का लक्ष्य वैश्विक तेल बाजार में वेनेजुएला के तेल को अधिक जगह दिलाना है।

आतंकवाद पर कड़ा रुख और लोकतंत्र की तारीफ मुंबई में रुबियो ने 26/11 आतंकी हमलों के स्मारक पर श्रद्धांजलि दी, जहां अमेरिकी नागरिक भी मारे गए थे। साथ ही, उन्होंने भारत के घरेलू मुद्दों पर टिप्पणी करने से बचते हुए भारतीय लोकतंत्र की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन हर लोकतांत्रिक देश का हिस्सा हैं और यह भारत का आंतरिक मामला है।

निष्कर्ष: भारत के लिए क्या है दांव पर? रुबियो का यह दौरा भारत के लिए दो तरफा अवसर है। एक ओर ट्रेड डील के जरिए आर्थिक मजबूती का रास्ता खुल रहा है, तो दूसरी ओर ऊर्जा सुरक्षा के लिए अमेरिका और रूस के बीच संतुलन बनाना भारत के लिए बड़ी चुनौती होगी। जामनगर का दौरा यह साफ करता है कि आने वाले समय में रिलायंस जैसी भारतीय कंपनियां वैश्विक ऊर्जा राजनीति के केंद्र में रहने वाली हैं।

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