कांग्रेस और वैश्विक संगठनों का लिंक: क्या भारत में सत्ता परिवर्तन की विदेशी साजिश?
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देश की राजनीति में एक अंतरराष्ट्रीय जांच रिपोर्ट ने बड़ा भूचाल खड़ा कर दिया है। ग्लोबल केओस इंक नाम की एक रिपोर्ट ने भारत में होने वाले राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों और वैश्विक नेटवर्क के बीच संदिग्ध सांठगांठ की ओर इशारा किया है। इस खुलासे के बाद सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

ग्लोबल केओस इंक : 101 संगठनों का जाल

हालिया रिपोर्ट में 13 देशों में फैले 101 ऐसे संगठनों की पहचान की गई है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शनों के समन्वय और प्रचार में सक्रिय हैं। यह नेटवर्क वामपंथी और कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़े समूहों का है, जो दुनिया भर में अस्थिरता फैलाने और जनाक्रोश को राजनीतिक ताकत में बदलने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल और भारत का कनेक्शन

रिपोर्ट में प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल (PI) नामक संगठन का विशेष उल्लेख है। PI ने पिछले दिनों फ्रांस, स्पेन, अल्बानिया और भारत में चल रहे आंदोलनों को एक मंच पर लाने और उनके बीच सहयोग बढ़ाने की बात कही है। यह संगठन इन देशों में विरोध-प्रदर्शनों को संगठित करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

राहुल-सोनिया की मुलाकात पर उठे सवाल

राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात को लेकर है कि अप्रैल 2025 में राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने नई दिल्ली स्थित 10 जनपथ पर प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। ताजा खुलासों के बाद भाजपा ने इस बैठक पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसे विदेशी ताकतों के साथ जुड़ाव का हिस्सा बताया है।

भाजपा का हमला और 1 नवंबर का प्रदर्शन

भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने सवाल किया है कि क्या कांग्रेस 1 नवंबर को होने वाले प्रदर्शनों के लिए PI जैसे वैश्विक संगठनों के सीधे संपर्क में है? भाजपा ने इन प्रदर्शनों को अराजकता और सत्ता परिवर्तन की साजिश करार दिया है, जबकि कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एक लोकतांत्रिक हक है।

संजय राउत का बयान और विवाद

इस पूरे विवाद में शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत की एक टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया है। अल्बानिया में हुई हिंसा का हवाला देते हुए राउत ने भारत को उससे सबक लेने की बात कही थी, जिसे भाजपा ने देश विरोधी और उकसावे वाला बयान करार दिया है। हालांकि, पार्टी की ही प्रियंका चतुर्वेदी ने इस बयान से असहमति जताई है।

फिलहाल, 1 नवंबर को प्रस्तावित विपक्ष के प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय साज़िश के आरोपों के बीच का यह मामला शांत होने के बजाय और गहराता जा रहा है। क्या यह वास्तव में कोई विदेशी साजिश है या महज राजनीतिक प्रतिशोध, फिलहाल यह जांच का विषय बना हुआ है।

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